लद्दाख हिंसा, घायलों में कुछ नेपाली-कश्मीरी

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नई दिल्ली । 26 सितम्बर 25 । लद्दाख में हाल ही में हुई सैन्य और स्थानीय संघर्ष की घटना ने क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। इस हिंसा में दर्जनों लोग घायल हुए हैं, जिनमें नेपाली और कश्मीरी नागरिक भी शामिल हैं। यह घटना सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रही है।

लेह पुलिस के एक सीनियर अफसर ने भास्कर को बताया कि घायलों में सात नेपाली, जबकि कुछ कश्मीरी हैं। इनका स्थानीय रिकॉर्ड नहीं मिल रहा, इसलिए हिंसा की जांच विदेशी साजिश के एंगल से भी कर रहे हैं। हिंसा में बाहरी लोगों की भूमिका का पता लगाया जा रहा है।

इस बीच, सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लद्दाख की असली समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए मुझ पर हिंसा का आरोप लगा रही है। सरकार पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत मुझे गिरफ्तार कर जेल भेजने की तैयारी कर रही है।

लद्दाख की राजधानी लेह में पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर 24 अगस्त को हिंसा भड़की थी। पुलिस के साथ हुई हिंसक झड़प में 4 युवाओं की मौत हुई थी। 80 घायल हैं, जिनमें 40 पुलिसकर्मी हैं। 60 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। लेह में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन कर्फ्यू लगा है। स्कूल-कॉलेज कल तक बंद हैं।

वांगचुक की NGO का विदेशी फंडिंग लाइसेंस रद्द उधर, गृह मंत्रालय ने लेह हिंसा के लिए वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है। गुरुवार को मंत्रालय ने वांगचुक की एक संस्था स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) का विदेशी फंडिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है।

विदेशी अनुदान या दान के लिए एनजीओ को विदेशी अशंदान (विनियमन) एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है। मंत्रालय के निर्देश पर सीबीआई की टीम विदेशी फंडिंग की जांच कर रही थी, जिसमें पाया गया कि संस्था ने फंडिंग का गलत इस्तेमाल किया।

सीबीआई ने वांगचुक की एक और NGO हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ ऑल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL) के खिलाफ भी विदेशी फंडिंग (FCRA) मामले में भी जांच शुरू कर दी है। HIAL पर भी विदेशी चंदा कानून (FCRA) के उल्लंघन का आरोप है।

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