रामलीला उत्सव न केवल आस्था और भक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर को भी सुदृढ़ करता है– विजेंद्र गुप्ता

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  • स्पीकर ने राजधानी में आयोजित भव्य रामलीला आयोजनों में की सहभागिता
  •  दिल्ली में भव्य रामलीला महोत्सव का शुभारंभ

नई दिल्ली,। 23 सितम्बर 2025 । दिल्ली विधान सभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली में आयोजित विभिन्न रामलीला आयोजनों में सम्मिलित होकर भगवान श्रीराम की आराधना की, उनका आशीर्वाद लिया और सभी के कल्याण की मंगलकामना की। इस अवसर पर विधायक सतीश उपाध्याय एवं शिखा राय भी उपस्थित थी।

गुप्ता ने लाल किला मैदान में आयोजित नव श्री धार्मिक लीला में गणेश वंदना में भाग लेकर भगवान श्रीराम और माता सीता की पूजा-अर्चना की और उनके आशीर्वाद की कामना की। कार्यक्रम की शुरुआत रंगारंग नृत्य प्रस्तुतियों से हुई जिसके बाद रामलीला का विधिवत मंचन हुआ।प्रारंभिक मंचन में भगवान श्रीराम के अवतार का उद्देश्य दर्शाया गया, जिसमें दिखाया गया कि जब-जब अधर्म, अत्याचार और अन्याय बढ़ता है, तब-तब भगवान विष्णु धर्म की रक्षा और न्याय की पुनः स्थापना हेतु अवतार लेते हैं।

गुप्ता ने लाल किला स्थित परेड ग्राउंड में श्री धार्मिक लीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला महोत्सव के भव्य उद्घाटन समारोह में भाग लिया और इसे भगवान श्रीराम के आदर्शों और मर्यादा का सजीव चित्रण बताया। उन्होंने कहा कि “रामलीला केवल एक मंचन नहीं, बल्कि यह हमें जीवन के सच्चे उद्देश्य की याद दिलाती है कि हमें सदैव सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलना चाहिए।”

विधान सभा अध्यक्ष ने दक्षिणी दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में श्री राम धार्मिक रामलीला समिति तथा चिराग दिल्ली में श्री धार्मिक रामलीला द्वारा आयोजित रामलीला महोत्सव–2025 का भी भ्रमण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रामलीला का मंचन न केवल भगवान श्रीराम के दिव्य चरित्रों का स्मरण कराता है, बल्कि समाज को धर्म, सत्य और आदर्श जीवन के मूल्यों का पालन करने की प्रेरणा भी देता है।

गुप्ता ने लाल किला मैदान में नव श्री धार्मिक लीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला के उद्घाटन में भी भाग लिया और इस महोत्सव को भारतीय संस्कृति और परंपरा का जीवंत उत्सव बताया। उन्होंने कहा—“रामलीला महोत्सव हमारी अमूल्य धरोहर से नई पीढ़ी को जोड़ते हुए समाज को आदर्श जीवन की प्रेरणा देता है।”

अपने संबोधन में विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि ऐसे उत्सव न केवल आस्था और भक्ति को प्रगाढ़ करते हैं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक बुनियाद को और मजबूत बनाते हैं। भगवान श्रीराम का सनातन संदेश आज भी मानवता को सत्य, न्याय और सद्भाव की ओर ले जाने वाला मार्गदर्शन प्रदान करता है। रामलीला जैसे पर्व हमें भारत की समृद्ध परंपराओं और शाश्वत मूल्यों की पुनः स्मृति कराते हैं।

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