समस्या को खत्म करने के लिए उद्योग व कॉरपोरेट जगत को भी जोड़ा जाएगा – वीके सक्सेना

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  • यमुना नदी को स्वच्छ व निर्मल बनाना हमारी सरकार की प्रतिबद्धता – रेखा गुप्ता आगामी चुनावों में यमुना की सफाई राजनीतिक मुद्दा नहीं बनेगी – प्रवेश वर्मा

नई दिल्ली । 8 सितंबर 2025 । दिल्ली की रेखा सरकार ने देश की राजधानी को सही मायनों में ‘विकसित दिल्ली’ बनाने के लिए एक और महत्वपूर्ण पहल की है। दिल्ली की तीन बड़ी चुनौतियों जैसे यमुना का प्रदूषण, कूड़े के पहाड़ व वायु प्रदूषण को प्रभावी रूप से खत्म करने के लिए उद्योग व कॉरपोरेट जगत को भी जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के संदर्भ में सरकार और उद्योग की साझेदारी के अंतर्गत किए गए कई सफल प्रयासों की ही कड़ी है। मुख्मंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि यमुना नदी को स्वच्छ व निर्मल बनाना हमारी सरकार की प्रतिबद्धता है।

इस महत्वपूर्ण विषय को लेकर आज राजनिवास में दि ‘यमुना और दिल्ली का पुनर्जीवन- एक सीएसआर संवाद’ का आयोजन किया गया। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के साथ मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने इसकी अध्यक्षता की। संवाद में सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अतिरिक्त शीर्ष उद्योग संघों के प्रतिनिधि, भारतीय उद्योग, कॉरपोरेट जगत, सार्वजनिक उपक्रमों के प्रमुख भी शामिल हुए। संवाद में दिल्ली जल बोर्ड की ओर से उन क्षेत्रों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई, जहां उद्योग जगत के साथ साझेदारी स्थापित की जा सकती है। संवाद में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कहा कि नई सरकार को विरासत में मिली तीन बड़ी समस्याएं- यमुना नदी का प्रदूषण, ठोस कचरे के पहाड़ और वायु प्रदूषण, दिल्ली की मुख्य चुनौतियाँ हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय राजधानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनामी दिलाई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार इन समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है और इसके सकारात्मक परिणाम भी दिखने लगे हैं। उपराज्यपाल ने कहा कि इस दिशा में प्रयास तभी सफल होंगे जब समाज के हर वर्ग, विशेषकर कॉरपोरेट क्षेत्र, सीएसआर के माध्यम से अपनी भूमिका निभाएं।

संवाद में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी उपरोक्त तीन विरासत में मिली समस्याओं का उल्लेख किया और कहा कि समस्याओं से निपटने के लिए उद्योग जगत से अपेक्षित सहयोग मुख्य रूप से सीवेज ट्रीटमेंट की तकनीक एवं प्रौद्योगिकी और ऐसी कार्य-संस्कृति का विकास है, जिससे यमुना नदी का प्रदूषण स्थायी रूप से समाप्त हो सकता है। गुप्ता ने सुझाव दिया कि उद्योग अपने सीएसआर उपक्रमों के अंतर्गत एक ‘कॉर्पस फंड’ स्थापित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड उद्योगों को ऐसी परियोजनाओं की सूची उपलब्ध कराएगा, जिनमें वे अपने सीएसआर फंड का सीधा उपयोग कर सकें। मुख्यमंत्री का स्पष्ट कहना था कि यमुना को निर्मल व स्वच्छ रखना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। हमारी सरकार उसे फिर से पुराने रूप में लौटाना चाहती हैं, जिसकी इच्छा दिल्ली के लोग भी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन सरकार, उद्योग और समाज एक साथ काम करें तो किसी भी समस्या का समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पूरी नीयत और ईमानदारी से दिल्ली को स्वच्छ, हरित और प्रदूषण-मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी कार्य-संस्कृति विकसित करनी होगी, जिसमें परियोजनाएं अगले 50 वर्षों तक पर्यावरण की रक्षा करती रहें। बैठक में उद्योग जगत से अपील की गई कि वे नालों को गोद लें और उनके किनारे छोटे-छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाएं। इससे यमुना में जाने वाले प्रदूषण को काफी हद तक रोका जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने हाल ही में यमुना बाढ़ क्षेत्र में विकसित किए गए बनसेरा, असीता, वाटिका आदि हरित क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां इच्छा होती है, वहां रास्ता भी निकलता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि उनकी सरकार राजधानी की समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव कदम उठाना शुरू कर चुकी है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उद्योग जगत जब अपने सीएसआर उपक्रमों के अंतर्गत वृक्षारोपण भी करे ताकि दिल्ली का पर्यावरण मजबूत हो। मुख्यमंत्री का यह भी कहना है कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के संदर्भ में सरकार और उद्योग की साझेदारी के अंतर्गत किए गए कई सफल प्रयासों की ही कड़ी है। संवाद में जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि चाहे कार्य कितना भी कठिन क्यों न हो, सरकार निर्धारित समय सीमा के भीतर यमुना की सफाई सुनिश्चित करेगी और विश्वास दिलाया कि दशकों बाद अब आगामी चुनावों में यमुना की सफाई राजनीतिक मुद्दा नहीं बनेगी।

यह भी तय हुआ कि इस प्रथम बैठक के बाद दिल्ली जल बोर्ड, अन्य संबंधित विभाग तथा उद्योग संगठनों के बीच विचार-विमर्श होगा और ठोस कार्ययोजना बनाई जाएगी, जिसमें समयबद्ध लक्ष्य और विशिष्ट परिणाम तय होंगे। इसके बाद शीर्ष स्तर पर इसी प्रकार की एक और बैठक आयोजित की जाएगी।

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