शांति मानवता का सच्चा मार्ग है और अहिंसा उसकी सबसे बड़ी ताकत है – विजेन्द्र गुप्ता

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  • स्पीकर ने अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में वैश्विक शांति का आह्वान कर ‘विश्व गुरु’ के रूप में भारत की भूमिका को बताया
  • भारत के पहले ‘वर्ल्ड पीस सेंटर’ के उद्घाटन संबोधन में राष्ट्र की अहिंसा की विरासत को किया उजागर
  • वर्ल्ड पीस सेंटर और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की साझेदारी से शैक्षिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा”

नई दिल्ली, 31 अगस्त 2025 । “शांति मानवता का सच्चा मार्ग है और अहिंसा उसकी सबसे बड़ी ताकत है” — यह बात दिल्ली विधान सभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने भारत के पहले नवस्थापित वर्ल्ड पीस सेंटर में आयोजित ‘विश्व शांति, सद्भाव और शांति शिक्षा’ पर आयोजित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही। अहिंसा विश्व भारती द्वारा परम पूज्य आचार्य डॉ. लोकेश मुनि के मार्गदर्शन में आयोजित इस संगोष्ठी में भारत और विदेश से आए अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने वैश्विक शांति, सद्भाव और शांति शिक्षा की परिवर्तनकारी भूमिका पर विचार-विमर्श किया।

अपने संबोधन में गुप्ता ने कहा, “भारत का इतिहास शांति और अहिंसा का इतिहास है। भगवान महावीर ने कहा था ‘अहिंसा परम धर्म है’, भगवान बुद्ध ने करुणा से एकजुट महाद्वीप का सपना देखा था और महात्मा गांधी ने यह सिद्ध किया कि सत्य और अहिंसा से साम्राज्यवादी शक्तियों को भी परास्त किया जा सकता है।उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पुनर्जीवित किया है। 2022 में रूस–यूक्रेन युद्ध के दौरान, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, जी20 और ब्रिक्स में कहा — ‘यह युद्ध का युग नहीं, बल्कि शांति, स्थिरता और सहयोग का समय है।’ भारत ने समय रहते दुनिया को यह संदेश दिया कि भविष्य युद्ध में नहीं, बल्कि शांति में है।”

अध्यक्ष ने परम पूज्य आचार्य लोकेश और अहिंसा विश्व भारती को भारत के पहले ‘वर्ल्ड पीस सेंटर’ की स्थापना के लिए बधाई दी और उसके नए ऑडिटोरियम में आयोजित प्रथम संगोष्ठी के ऐतिहासिक अवसर की सराहना की। उन्होंने भारत की ‘विश्व गुरु’ के रूप में भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की पहचान शांति और अहिंसा के मूल्यों में गहराई से निहित है, जो भगवान महावीर, भगवान बुद्ध और महात्मा गांधी की शिक्षाओं में निहित है।

गुप्ता ने वर्ल्ड पीस सेंटर और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के बीच होने वाले आगामी सहयोग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह साझेदारी शैक्षिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगी और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ — पूरी दुनिया एक परिवार है — का संदेश सीमाओं के पार ले जाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की भागीदारियां यह सिद्ध करती हैं कि मानवता की समस्याओं का समाधान युद्ध से नहीं, बल्कि सहयोग, संवाद और परस्पर सम्मान से होता है।

विश्व शांति राजदूत आचार्य डॉ. लोकेश के शांति प्रयासों की सराहना करते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि डॉ. लोकेश ध्यान, योग और शांति शिक्षा के विशेषज्ञ हैं। व्यापक शोध के बाद उन्होंने एक ‘शांति शिक्षा’ पाठ्यक्रम तैयार किया है, जो भारत की प्राचीन ध्यान–योग परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समन्वित करता है। यह शिक्षा मानव के भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों को दूर करती है और मानवीय तथा दिव्य गुणों को जागृत करती है, जिससे करुणा, सद्भाव और सकारात्मक मानवीय मूल्यों का विकास होता है।

अपने संबोधन के अंत में, गुप्ता ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ल्ड पीस सेंटर की स्थापना वैश्विक स्तर पर संवाद, समझ और सहयोग को बढ़ावा देने वाला एक प्रकाशस्तंभ साबित होगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहलें न केवल भारत की स्थिति को शांति कूटनीति के नेता के रूप में मजबूत करती हैं, बल्कि विश्व को भी प्रेरित करती हैं कि वह समकालीन चुनौतियों का समाधान अहिंसा और सद्भाव के सिद्धांतों को अपनाकर करे।

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