- सीएम ने यू-स्पेशल बसों की पुरानी दास्तां बताईं
- कहा कि बसों की सीढ़ियों पर बैठकर हवा खाने का मजा ही और था
नई दिल्ली, 28 अगस्त, 2025 । दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) की अध्यक्ष रह चुकीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने दौर में चलने वाली यू-स्पेशल बसों की दास्तां सुनाई और बताया कि ये बसें यूनिवर्सिटी की लाइफ लाइन हुआ करती थीं। उन्होंने बताया कि इन बसों में आने-जाने से दिन-भर की टेंशन दूर हो जाती थी। यू-स्पेशल बसों की विशेषताएं यह भी थी कि यह टाइम पर चलती थी, जिसके चलते ये बसें वक्त पर कॉलेज और घर भी पहुंचा देती थीं। मुख्यमंत्री ने मुस्कराते हुए बताया कि यू-स्पेशल बसों की सीढ़ियों पर बैठकर हवा खाते हुए सफर करने का मजा ही कुछ और था।
दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में यू-स्पेशल बसों के उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने छात्र-जीवन की दास्तां कॉलेज के विद्यार्थियों को सुनाई और यादों में खोते हुए इन यू-स्पेशल बसों के पुराने दिनों को बड़े ही अपनेपन और भरी ऊर्जा से याद किया। मुख्यमंत्री ने अपने भावुक संबोधन में कहा कि उन्हें ठीक से याद नहीं कि किन परिस्थितियों में और किस सरकार के कार्यकाल में यू-स्पेशल बसें बंद हुईं, लेकिन जब ये चलती थीं तो यह दिल्ली विश्वविद्यालय की जीवन रेखा थीं। उन्होंने कहा कि कॉलेज से लेकर घर तक सुरक्षित और समय पर पहुंचाने का जिम्मा ये बसें उठाती थीं। दोस्तों के साथ मिलकर सफर करना, गपशप करना, हंसते-बोलते घर लौटना… यह सब एक यादगार अनुभव था। मुख्यमंत्री के अनुसार साल 1998 में जब उन्होंने विश्वविद्यालय छोड़ा था, तब तक यू-स्पेशल बंद हो चुकी थीं। लेकिन आज वह इन्हें आप सबके लिए फिर से वापस लाई हैं।

रेखा गुप्ता ने बताया कि खूब मजा आता था इन यू-स्पेशल बसों में। सभी कॉलेज के स्टूंडेंट्स अपने दोस्तों के साथ इन बसों में सफर करते थे। इन बसों में आम लोगों को चढ़ने नहीं दिया जाता था। इन बसों में सफर करने से पूरे दिन की टेंशन खत्म हो जाती थी। हम रिलेक्स महसूस करते थे। उसका कारण यह था कि दोस्तों के बीच खूब गपशप और पूरे दिन की बातें शेयरिंग होती थी। सभी स्टूडेंट्स गाते-बजाते, हंसते-मुस्कराते घर पहुंच जाते थे। अगले दिन सुबह फिर इन बसों का इंतजार करते थे कि इन यू स्पेशल बसों में जाना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि एक जो हम हरकत करते थे, वे आप स्टूडेंट्स इन नई बसों में नहीं कर पाओगे। वह था इन बसों की सीढ़ियों पर बैठकर हवा खाते हुए सफर करना। बसों की सीढ़ियों पर बैठने से खूब हवा आती थी। हम वहां इसलिए बैठते थे, क्योंकि बस के अंदर गर्मी होती थी। बस रुकने पर किसी स्टूडेंट को उतरना होता था तो हम साइड में खिसक जाते थे, लेकिन उठते नहीं थे। मुख्यमंत्री के अनुसार वह शानदार और जानदार दिन थे।
मुख्यमंत्री ने कॉलेज विद्यार्थियों से कहा कि आज की ये नई यू-स्पेशल बसें पूरी तरह से आधुनिक तकनीक से सुसज्जित हैं। एसी, म्यूजिक सिस्टम और कैमरे जैसी सुविधाएं हैं, जो न केवल यात्रा को आरामदायक बनाएंगी बल्कि सुरक्षा को भी और मजबूत करेंगी। मुख्यमंत्री ने मुस्कराते हुए कहा कि हमें तो अंताक्षरी खेलनी पड़ती थी, लेकिन अब आप लोग म्यूजिक का आनंद सीधे सफर के दौरान उठा पाएंगे। उन्होंने विशेष तौर पर छात्राओं की सुरक्षा और सुविधा पर बल देते हुए कहा कि ये बसें न केवल समय पर छात्रों को कॉलेज पहुंचाएंगी, बल्कि उन्हें निश्चिंत होकर पढ़ाई और भविष्य की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर भी देंगी। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि जब वह स्वयं डूसू की अध्यक्ष थीं, तब उन्होंने यू-स्पेशल बसों की बढ़ोतरी के लिए आंदोलन किए थे और आज मुख्यमंत्री के रूप में उसी संकल्प को पूरा होते देखना उनके लिए गर्व और संतोष का क्षण है।जानिए यू क्या है आज स्पेशल बसें और डीटीसी का नवीनतम हालचाल,
25 नई यू-स्पेशल बसें और रूट
25 नई यूनिवर्सिटी स्पेशल बसों की शुरुआत से दिल्ली विश्वविद्यालय और आसपास के इलाकों के विद्यार्थियों को विशेष और भरोसेमंद कनेक्टिविटी मिलेगी। ये बसें उत्तरी परिसर, दक्षिणी परिसर, जेएनयू, आईआईटी दिल्ली और प्रमुख रिहायशी क्षेत्रों को जोड़ेंगी। इनके रूट ध्यानपूर्वक बनाए गए हैं, जैसे नरेला से पटेल चेस्ट, नजफगढ़ से अरबिंदो कॉलेज, पूर्वांचल हॉस्टल से रामजस कॉलेज, रिठाला मेट्रो से अदिति कॉलेज और अन्य शैक्षिक इलाके। इन बसों का शेड्यूल कॉलेजों के समय के हिसाब से तैयार किया गया है ताकि छात्रों को ज्यादा से ज्यादा सुविधा मिल सके।
युवाओं को सार्वजनिक बसों से जोड़ने की कवायद

इन कदमों के ज़रिए डीटीसी युवाओं को सार्वजनिक परिवहन का ज़्यादा उपयोग करने, निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और एक टिकाऊ और छात्र-अनुकूल परिवहन प्रणाली को बढ़ावा देना चाहती है। यू-स्पेशल बसो की यह शुरुआत दिल्ली की परिवहन व्यवस्था को और अधिक समावेशी, आधुनिक और पर्यावरण-सचेत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बसों में पहली बार संगीत (Music in Buses) की पहल
डीटीसी दिल्ली-एनसीआर में अपनी तरह की पहली बार बसों में संगीत की शुरुआत करेगा। यह एक लाइव रेडियो चैनल होगा जो छात्रों के सफर को मजेदार और जीवंत बनाएगा। इस सेवा में मनोरंजन के साथ-साथ क्यूआर कोड और व्हाट्सएप के माध्यम से यात्रियों से जुड़ाव भी होगा। यह सरकारी संदेशों और सामाजिक अभियानों के लिए भी एक मंच का काम करेगा।
दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों की स्थिति
दिल्ली के पास इस समय देश में सबसे ज़्यादा इलेक्ट्रिक बसें हैं। 2025 के मध्य तक, दिल्ली में कुल 2,949 इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं, जिनमें से 2,210 बसें डीटीसी के तहत और 739 बसें क्लस्टर योजना के तहत हैं। यह पूरी तरह प्रदूषण मुक्त हैं और स्वच्छ और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाती हैं।

यादों को ‘सहेजने’ दौलतराम कॉलेज पहुंची रेखा गुप्ता
छात्रों संग साझा किए पुराने संघर्ष और प्रेरणादायी अनुभव
अपने छात्र जीवन (कॉलेज), विश्वविद्यालय की राजनीति के संघर्षों की यादों में डूबती-उतराती मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सुबह दौलतराम कॉलेज पहुंच गई। वहां उन्होंने भरे मन से विद्यार्थियों से मुलाकात की और फेकल्टी के पुराने स्टाफ से अपनत्व दिखाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षण उनके जीवन की पुरानी किताब का वह पन्ना खोल रहा है, जिसने उनके व्यक्तित्व और करियर को दिशा दी।
मुख्यमंत्री ने आज दिल्ली विश्वविद्यालय स्थित नॉर्थ कैंपस के खेल परिसर में यू-स्पेशल बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने वहां काफी देर समय बिताया। मुख्यमंत्री अचानक ही यू-स्पेशल बस में सवार हुई और अपने स्टाफ से कहा कि दौलतराम कॉलेज चलो। मुख्यमंत्री ने इसी कॉलेज से शिक्षा ग्रहण की है। विशेष बात यह कि इस कॉलेज मे जाना मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल नहीं था। हतप्रभ स्टाफ व अफसरों को पता चला कि मैम “अल्मा मेटर” दौलत राम कॉलेज जाना चाहती है तो वे मुस्कराने लगे। बस में संगीत बजने लगा, छात्र गाने लगे और मुख्यमंत्री गुनगुनाने लगी। कॉलेज छात्रों को भी पता चल चुका था कि उनकी पुरानी छात्र व दिल्ली की सीएम आ रही हैं तो वे कॉलेज गेट पर उमड़ आए। कॉलेज गेट पर उतरते ही मुख्यमंत्री को छात्रों ने घेर लिया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कई छात्रों से गपशप शुरू कर दी और कहा कि तुम्हारी दीदी, तुमसे मिलने आ गई हैं। छात्र भी हंसते-मुस्कराते उनका अभिवादन करने लगे।

मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने छात्रों के अलावा कॉलेज फेकल्टी के पुराने स्टाफ से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि इसी कॉलेज के प्रांगण से उड़ान भरना सीखा, यहीं से संघर्ष की राह पकड़ी और यहीं से मिला वह आत्मविश्वास जिसने मुझे दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ का अध्यक्ष बनने और आगे चलकर जनसेवा की राह चुनने की प्रेरणा दी। दौलत राम मेरे लिए केवल दीवारों और क्लासरूम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वह अहसास है, जिसने मेरी सोच को आकार दिया, मेरे सपनों को दिशा दी और मेरे जीवन को एक लक्ष्य दिया। मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक साधारण परिवार की बेटी जब इस कॉलेज में पढ़ने आई, तो उसे नहीं पता था कि उसकी राह दिल्ली सचिवालय तक जाएगी और वह मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचेगी। यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कॉलेज के छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आप सभी भाग्यशाली हैं कि दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि स्काय इज द लिमिट- ऊंचा सोचिए, ऊंचा करिए, न रुकिए, न थमिए और न हारिए। ज़िंदगी में न जाने कौन सी मंज़िल आपका इंतज़ार कर रही है।
