ट्रम्प के सलाहकार ने यूक्रेन जंग को ‘मोदी वॅार’ बताया

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वाशिंगटन । 28 अगस्त 2025 । अमेरिका की सियासत में एक बड़ा बयान सामने आया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक करीबी सलाहकार ने यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध को लेकर विवादित टिप्पणी करते हुए इसे ‘मोदी वॉर’ करार दिया। इस बयान के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय हलचल तेज हो गई है।

सलाहकार ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें वैश्विक शक्तियों की रणनीतिक भूमिका है। इसी संदर्भ में उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया और युद्ध को ‘मोदी वॉर’ बताया। हालांकि, उन्होंने इस बयान का विस्तृत संदर्भ स्पष्ट नहीं किया, जिसके कारण इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

भारत ने हमेशा से रूस-यूक्रेन युद्ध में तटस्थ रुख अपनाया है और शांति वार्ता का समर्थन किया है। ऐसे में इस टिप्पणी पर भारतीय राजनीति में भी प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। विपक्षी दलों ने इसे गंभीरता से लिया है, जबकि सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि भारत का नाम इस तरह खींचना अनुचित है।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी राजनीति में इस तरह के बयान अक्सर चुनावी रणनीति और वैश्विक समीकरणों से प्रेरित होते हैं। फिर भी, भारत के संदर्भ में इसे जोड़ना कई सवाल खड़े करता है।

नवारो बोले- भारत का रूसी तेल खरीदना अमेरिका के लिए नुकसानदायक

नवारो ने कहा, ‘मोदी एक महान नेता हैं, भारत एक लोकतंत्र देश है, फिर भी वे हमारी आंखों में आंखें डालकर कहते हैं कि हम रूसी तेल खरीदना बंद नहीं करेंगे। अब इसका क्या मतलब है?’

नवारो ने रूस पर भारत को बेचे गए तेल के बदले मिलने वाले पैसों से युद्ध मशीनरी को चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा- रूस यूक्रेन पर हमले कर वहां के लोगों को मारता है। फिर यूक्रेन हमारे और यूरोप के पास आकर कहता है कि हमें और पैसा दो। इस तरह अमेरिकी करदाताओं को नुकसान होता है।

नवारो ने तर्क दिया कि भारतीय रिफाइनरीयां प्रॉफिट कमाने के लिए सस्ते रूसी कच्चे तेल को खरीदती है और फिर भारतीय रिफाइनरी, रूसी रिफाइनरी के साथ मिलकर उसे बाकी दुनिया को ऊंचे दाम पर बेचते हैं। इससे अमेरिका को नुकसान होता है।

नवारो ने आगे कहा कि अमेरिकी जनता, कारोबार, कामगार सब संकट में हैं, क्योंकि भारत ने बहुत ऊंचे टैरिफ लगा रखे हैं। इसकी वजह से अमेरिका में नौकरियां जा रही हैं, कारखाने बंद हो रहे हैं, लोगों की आमदनी भी खत्म हो रही है। अमेरिकी टैक्सपेयर्स को भी घाटा उठाना पड़ रहा है।

नवारो ने मोदी को एरोगेंट कहा

नवारो ने तेल आयात पर भारत के दावों को खारिज किया। उन्होंने मोदी पर एरोगेंट (घमंडी) होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत का हर रोज 15 लाख बैरल रूसी तेल खरीदना, यूक्रेनी लोगों को मारने के लिए हथियार, ड्रोन और बम खरीदने के लिए काफी है।

दरअसल, ट्रम्प पहले भी भारत पर रूसी तेल खरीद कर यूक्रेन जंग को बढ़ावा देने का आरोप लगा चुके हैं। इसे भारत ने गलत बताते हुए कहा था कि हम अपने देश की जरूरतों के हिसाब से फैसले लेते हैं।

नवारो की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगाया है। इस कदम से अमेरिका को भारत के 66% निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है। भारत-अमेरिका के बीच 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 131.8 अरब डॉलर था।

भारत रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार

भारत, चीन के बाद रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से सिर्फ 0.2% (68 हजार बैरल प्रतिदिन) तेल इम्पोर्ट करता था। मई 2023 तक यह बढ़कर 45% (20 लाख बैरल प्रतिदिन) हो गया, जबकि 2025 में जनवरी से जुलाई तक भारत हर दिन रूस से 17.8 लाख बैरल तेल खरीद रहा है।

नवारो बोले- भारत ट्रेड में धोखाधड़ी करता है

भारत पर हाई टैरिफ से भारतीय निर्यातकों ने नौकरी जाने और ऑर्डर रद्द होने की चेतावनी दी है। कपड़ा इंडस्ट्री के एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि इस कदम से भारतीय परिधान उद्योग अमेरिकी बाजार से बाहर हो सकता है।

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