तिरंगा केवल सम्मान का प्रतीक नहीं, बलिदानों की याद भी है – कमलजीत शहरावत

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• कुछ कर गुजरने का जुनून, अच्छे संस्कार और समाज के लिए योगदान की आवश्यकता है – आशीष सूद

• सूद के नेतृत्व में जनकपुरी में भव्य तिरंगा यात्रा निकली

• 8,000 से अधिक लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी।

नई दिल्ली । 13 अगस्त 25 । दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जनकपुरी विधानसभा के C – 1 ब्लॉक् से डाबड़ी चौक तक आयोजित भव्य ‘तिरंगा यात्रा’ में हाथ में तिरंगा लेकर यात्रा का नेतृत्व किया। इस यात्रा में पश्चिमी दिल्ली की सांसद श्रीमती कमलजीत शहरावत के साथ जनकपुरी एवं आसपास की कॉलोनियों के निवासी, विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक व व्यापारिक संगठन, आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी और कई स्कूलो के बच्चों ने तिरंगा लेकर उत्साहपूर्वक भाग लिया। यात्रा में लगभग 8,000 लोगों ने हिस्सा लिया और पूरे क्षेत्र में देशभक्ति एवं एकता का संदेश गूंजता रहा।
सूद ने अपने संबोधन में कहा, “जनकपुरी के सभी संगठनों और यहां के नन्हें-मुन्ने बच्चे विकसित दिल्ली, विकसित जनकपुरी और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए आज भारी संख्या में एकत्रित हुए हैं। यह तिरंगा यात्रा न केवल स्वतंत्रता दिवस का उत्सव है, बल्कि स्वच्छता और सकारात्मक सामाजिक बदलाव का संदेश भी देती है।”

उन्होंने यात्रा में शामिल बच्चों को अपने बचपन की स्वतंत्रता दिवस की यादों को साझा करते हुए कहा कि 15 अगस्त का दिन केवल झंडा फहराने और पतंग उड़ाने का दिन नहीं, बल्कि देश के लिए कुछ सार्थक करने का अवसर है। उन्होंने देसी उत्पादों के प्रयोग पर बल देते हुए लोगों से आग्रह किया कि वह पतंग उड़ाते समय चाइनीज़ मांझा का प्रयोग न करें, बल्कि देशी मांझा और तिरंगी पतंग से आसमान को सजाएं। यह भी अपने देश के लिए कुछ सार्थक करने का उदाहरण बनेगा।
सूद ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नारे “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” को याद करते हुए कहा कि आज देश को खून नहीं, बल्कि देश के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून, अच्छे संस्कार और समाज के लिए योगदान की आवश्यकता है।
कारगिल के शहीदों को याद करते हुए सूद ने कहा की देश के प्रति जैसा समर्पित जीवन उन रणबांकुर युवाओं ने जिया वह हम सब के लिए प्रेरणास्रोत है। मात्र 20- से 25 साल के युवाओं ने देश के लिए जो बलिदान दिया वह अदभुत है। मैं दिल से ये मानता हूं कि कुछ ना कुछ ज़रूर उन व्यक्तियों के अंदर होता है जिसके कारण वे लोग अपना जीवन इस देश के ऊपर कुर्बान कर देते हैं।


श्री सूद ने यह भी कहा की हम सबको बॉर्डर पर जाने की जरूरत नहीं है । हम में से हर व्यक्ति को बॉर्डर पर जाकर दुश्मन का सामना नही करना बल्कि देश हित में ऐसे काम करने है जिनसे आने वाली पीढ़ियां हमे सदियों तक याद रख सकें। मैं तो यहाँ तक मानता हूँ कि अपने आसपास को साफ रखना और ये निर्णय करना कि मैं कोई गलत काम नहीं करूँगा, देश के ट्रैफिक सिग्नल्स का पालन करना, देश के अंदर बेहतर सिविक सेंस के साथ अच्छे नागरिक बनके रहना, इस देश और समाज के लिए यहाँ के पर्यावरण की रक्षा करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना भी एक प्रकार की देशभक्ति ही है। ये भी देश के लिए बहुत बड़ा काम है जिसको हम सबको करना चाहिए।
इस अवसर पर सांसद कमलजीत शहरावत ने कहा की तिरंगा केवल सम्मान का प्रतीक नहीं, बल्कि उन अनगिनत बलिदानों की याद है, जिनके कारण हमें इसे लहराने का अधिकार मिला। 15 अगस्त 1947 की आज़ादी के पीछे भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष बोस और महात्मा गांधी जैसे महापुरुषों के त्याग की अमिट गाथाएं हैं।


महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका में हुए अपमान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गांधी जी ने ट्रेन से उतारने का अपमान व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्र का अपमान मानते हुए अपना पूरा जीवन स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित कर दिया था।

उन्होंने यह भी कहा की आज की पीढ़ी को देश के लिए मरने का अवसर भले न मिला हो, पर देश के लिए जीने का अवसर अवश्य मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2047 तक विकसित भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए उन्होंने नागरिकों से राष्ट्रभक्ति, सेवा और विकास में योगदान का आह्वान किया ।

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