” यहां कभी कोई फांसीघर नहीं था”, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ विरासत का संरक्षण आवश्यक — विजेन्द्र गुप्ता

Date:

  •  115 वर्ष पुरानी धरोहर, विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली विधानसभा भवन की ऐतिहासिक विरासत को किया रेखांकित
  •  मिथकों को दूर करने हेतु मीडिया को ऐतिहासिक स्थलों का कराया भ्रमण

नई दिल्ली । 6 अगस्त 2025 । दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मीडिया प्रतिनिधियों को विधानसभा परिसर के उस स्थान का भ्रमण कराया जिसे “फांसीघर” कहकर प्रस्तुत किया गया था। भ्रमण का उद्देश्य तथ्यों के आधार पर ऐतिहासिक सच्चाई स्पष्ट करना और इस प्रकार की भ्रामक धारणाओं को दूर करना था।

गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यहां फांसीघर जैसा कोई स्थान कभी नहीं रहा है। न तो कोई ऐतिहासिक प्रमाण है, न ही कोई अभिलेखीय आधार। यह पूरी तरह से एक मिथ्या प्रस्तुति है।”

भ्रमण के दौरान अध्यक्ष ने विधानसभा भवन के ऐतिहासिक विकास की जानकारी देते हुए बताया कि इस इमारत की कहानी 11 दिसंबर 1911 से शुरू होती है, जब किंग जॉर्ज पंचम के दिल्ली दरबार में तत्कालीन वायसराय द्वारा भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की ऐतिहासिक घोषणा की गई थी। इसके बाद नई राजधानी में सचिवालय और इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल के लिए भवन निर्माण की आवश्यकता पड़ी।

1912 में इस विधानसभा कक्ष का निर्माण प्रसिद्ध ब्रिटिश वास्तुकार ई. मोंटेग्यू थॉमस के डिजाइन में आरंभ हुआ और मात्र आठ महीनों में श्री फकीर चंद ठेकेदार की देखरेख में कार्य पूर्ण हुआ। यह भवन पहले इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल तथा 1919 के बाद सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली का कार्यस्थल रहा। इसके मूल स्थापत्य चित्र आज भी राष्ट्रीय अभिलेखागार में संरक्षित हैं।

गुप्ता ने भ्रमण के दौरान भवन की प्रमुख विशेषताओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि अध्यक्ष कक्ष के दोनों ओर बराबर दूरी पर दो एक जैसे लिफ्ट शाफ्ट स्थित हैं, जो ब्रिटिश काल में सदस्यों तक टिफिन पहुँचाने के लिए बनाए गए थे। इन सेवा कक्षों को ही अब गलत तरीके से “फांसीघर” कहकर प्रचारित किया जा रहा है, जबकि इसका कोई ऐतिहासिक या स्थापत्य प्रमाण मौजूद नहीं है।

अध्यक्ष ने कहा कि “यह भवन सिर्फ 115 वर्ष पुराना स्मारक नहीं है, बल्कि यह भारत की संवैधानिक और राजनीतिक यात्रा का साक्षी है।दिल्ली को राजधानी बनाए जाने से लेकर इस कक्ष के निर्माण तक की यात्रा एक ऐतिहासिक परंपरा है, जिसे तथ्यों और श्रद्धा के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।”

गुप्ता ने यह भी कहा कि इस विषय को सदन में औपचारिक रूप से उठाया जाएगा ताकि सभी तथ्य और दृष्टिकोण विधिवत रूप से रिकॉर्ड पर आ सकें। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि जनता के करोड़ों रुपये इस भवन को एक काल्पनिक “फांसीघर” के रूप में प्रस्तुत करने में व्यर्थ खर्च कर दिए गए—जो ऐतिहासिक दृष्टि से भ्रामक और जनधन का दुरुपयोग है।

भ्रमण के समापन पर गुप्ता ने कहा, “ऐतिहासिक स्थलों की व्याख्या तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित होनी चाहिए, विशेषकर जब बात किसी संवैधानिक संस्था की हो। आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से जोड़ने का दायित्व हमारा है, और इसके लिए सत्यनिष्ठ प्रस्तुति अनिवार्य है।”

उन्होंने आश्वासन दिया कि दिल्ली विधानसभा अपनी संस्थागत विरासत को पूरी प्रामाणिकता और जिम्मेदारी के साथ संरक्षित व प्रस्तुत करने के लिए संकल्पबद्ध है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related