सरकार के लिए अलार्म का काम करती है PAC और CAG कमिटी – विजेंद्र गुप्ता

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  • मेघालय विधान सभा की लोक लेखा समिति के प्रतिनिधिमंडल से मिले दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष

नई दिल्ली, 14 जुलाई 2025 । “PAC और CAG सरकार के लिए एक अलार्म की तरह काम करती हैं, जिनका उद्देश्य सरकार को कार्रवाई के लिए प्रेरित करना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है,” यह बात आज दिल्ली विधान सभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मेघालय विधान सभा की लोक लेखा समिति के सदस्यों से मुलाकात के दौरान विधान सभा परिसर में कही। यह प्रतिनिधिमंडल 12 से 14 जुलाई 2025 तक हैदराबाद, विशाखापत्तनम और दिल्ली के अध्ययन दौरे पर है। अध्यक्ष ने सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए अंतर-विधायी संवाद और ज्ञान साझाकरण के प्रति उनके समर्पण की सराहना की।

प्रतिनिधिमंडल में चार्ल्स पायंगरॉप (विधायक, लोक लेखा समिति के अध्यक्ष एवं मेघालय विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष), लाहकमें रिंबुई (विधायक एवं सदस्य), गेविन मिगुएल मायलियेम (विधायक एवं सदस्य), रूपर्ट मोमिन (विधायक एवं सदस्य), रूपा एम. मारक (विधायक एवं सदस्य), सेंगचिम एन. संगमा (विधायक एवं सदस्य), जिमी डी. संगमा (विधायक एवं सदस्य), इयान बोथम के. संगमा (विधायक एवं सदस्य),
एवं बालाजिएद कूपर सिनरेम (विधायक एवं सदस्य) शामिल थे,जिनका उद्देश्य अन्य राज्य विधानमंडलों के साथ विचारों और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान करना था।दिल्ली विधान सभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट और लोक लेखा समिति के सभापति अजय महावर भी बैठक में उपस्थित थे।

इस अवसर पर गुप्ता ने मेघालय की जनसांख्यिकी और लोक लेखा समिति की संरचना के बारे में जानकारी ली। इस पर चार्ल्स पायंगरॉप ने बताया कि मेघालय एक मातृसत्तात्मक राज्य है, जहाँ मुख्य रूप से ख़ासी, जयंतिया और गारो जनजातियाँ निवास करती हैं। यह राज्य संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आंशिक रूप से स्वायत्त जिला परिषदों द्वारा शासित होता है, जो जनजातीय हितों की रक्षा करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि लोक लेखा समिति में अध्यक्ष सहित कुल दस सदस्य हैं, और आम तौर पर संतुलित निगरानी सुनिश्चित करने के लिए अध्यक्ष विपक्ष से होता है।

अध्यक्ष गुप्ता ने प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली विधान सभा में लागू ऑडिट पैरा मॉनिटरिंग सिस्टम के बारे में जानकारी दी, जो वित्तीय जवाबदेही को सशक्त बनाता है। इस दौरान मेघालय की PAC के सदस्यों ने वित्तीय निगरानी पर अपने विचार साझा किए और विधायी समितियों को और अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर चर्चा की।

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