ओवैसी बोले- भारतीय मुस्लिम नागरिक नहीं बंधक हैं

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नई दिल्ली । 08 जुलाई 25 । AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि भारत के अल्पसंख्यक अब दूसरे दर्जे के नागरिक भी नहीं हैं। हम बंधक हैं। अगवा कर बांग्लादेश में फेंक दिया जाना क्या संरक्षण है।

दरअसल, केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने X पर लिखा था- भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यकों से ज्यादा सुविधाएं और सुरक्षा मिलती है।

इसके जवाब में ओवैसी ने लिखा- आप (रिजिजू) भारत के मंत्री हैं, कोई सम्राट नहीं। सिंहासन नहीं संविधान के तहत पद पर बैठे हैं। अल्पसंख्यकों के अधिकार खैरात नहीं, मौलिक अधिकार हैं। हर दिन हमें पाकिस्तानी, बांग्लादेशी, जिहादी या रोहिंग्या कहकर बुलाया जाना क्या कोई सुविधा है।

इसके बाद रिजिजू ने लिखा- ठीक है, फिर हमारे पड़ोसी देशों से अल्पसंख्यक भारत आना क्यों पसंद करते हैं और हमारे अल्पसंख्यक पलायन क्यों नहीं करते। PM मोदी की योजनाएं सभी के लिए हैं। अल्पसंख्यक मामलों की योजनाएं ज्यादा लाभ देते हैं।

ओवैसी की पोस्ट की बातें…

  1. वक्फ में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति: क्या मुस्लिम किसी हिंदू ट्रस्ट (हिंदू एंडोमेंट बोर्ड) में शामिल हो सकते हैं? नहीं। फिर वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को क्यों शामिल किया गया? उन्हें बहुमत तक दे दिया गया।
  2. मुस्लिम छात्रवृत्तियों को रोका: आपने मौलाना आजाद नेशनल फैलोशिप और प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप फंडिंग बंद की। पोस्ट-मैट्रिक और मेरिट-कम-मीन्स स्कॉलरशिप को सीमित कर दिया। क्योंकि इनसे मुस्लिम छात्रों को मदद मिल रही थी।
  3. संवैधानिक अधिकारों की मांग: हम किसी और देश के अल्पसंख्यकों से तुलना नहीं मांग रहे। बहुसंख्यकों से ज्यादा कुछ नहीं मांग रहे। हम बस वही मांग रहे हैं जो संविधान ने हमें वादा किया है- सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय।
  4. मुस्लिम युवाओं की प्रगति रुकी: भारतीय मुस्लिम अब वह इकलौता समुदाय हैं जिनके बच्चों की हालत उनके माता-पिता या दादा-दादी से भी खराब हो गई है। पीढ़ियों के बीच तरक्की की रफ्तार उलटी हो गई है। भारत की तुलना पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका जैसे फेल स्टेट्स से न करें।

चर्चा के दौरान AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था- इस बिल का मकसद मुसलमानों को जलील करना है। मैं गांधी की तरह वक्फ बिल को फाड़ता हूं। बिल फाड़ने के बाद ओवैसी संसद की कार्यवाही छोड़कर चले गए।

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