पिताजी के लिए राजनीति सत्ता का माध्यम नहीं बल्कि सेवा का साधन थी – प्रवेश साहिब वर्मा

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  • दिल्ली देहात के शेर को नमन: स्व. साहिब सिंह वर्मा जी की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली । 30 जून 25 । आज स्वाभिमान स्थल, घेवरा मोड़ पर हजारों लोगों की उपस्थिति में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री, भारत सरकार में पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिल्ली देहात की बुलंद आवाज़ स्वर्गीय साहिब सिंह वर्मा को उनकी 18वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। यह आयोजन केवल एक स्मरण सभा नहीं था, बल्कि उनके द्वारा स्थापित मूल्यों — सरलता, त्याग और सेवा — की पुनर्पुष्टि भी थी।

उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार की संस्था ALIMCO (Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India) के सहयोग से एक विशाल कल्याणकारी वितरण शिविर आयोजित किया गया। इसमें ADIP योजना और राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत सैकड़ों दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को निशुल्क सहायक उपकरण वितरित किए गए। यह पहल साहिब सिंह वर्मा जी के उस विचार को चरितार्थ करती है कि शासन का पहला धर्म सबसे कमजोर को सशक्त बनाना है।

मुँडका गांव के एक किसान परिवार से निकलकर साहिब सिंह वर्मा जी दिल्ली की राजनीति के शीर्ष तक पहुँचे। लेकिन उन्होंने कभी अपनी जड़ों से दूरी नहीं बनाई। वे दिल्ली देहात की आत्मा को साथ लेकर चले और “देहात के शेर” के नाम से जन-जन के प्रिय बने। मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने किसानों, मजदूरों, अध्यापकों और छोटे व्यापारियों के सुख-दुख में बराबरी से भागीदारी निभाई।

स्वाभिमान संस्थान द्वारा आयोजित इस प्रार्थना सभा में दिल्ली सरकार के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों तथा दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री वीरेंद्र सचदेवा सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया और स्व. वर्मा जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने उनके जनकल्याणकारी योगदान और लोकनिष्ठा को भावपूर्ण स्मरण किया।

सभा को संबोधित करते हुए उनके पुत्र एवं दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा जी ने कहा “मेरे पिता केवल मेरे अभिभावक नहीं थे, बल्कि मेरे पहले शिक्षक, मार्गदर्शक और जीवन मूल्यों के प्रतीक थे। उन्होंने यह सिखाया कि राजनीति में रहकर भी ईमानदारी, सादगी और संस्कृति से जुड़ा रहना संभव है। उन्होंने केवल विधानसभा या संसद में दिल्ली की बात नहीं की — उन्होंने दिल्ली की आत्मा, विशेषकर ग्रामीण दिल्ली की आवाज़ को स्वर दिया। आज का यह आयोजन उनके उसी आदर्श — ‘सेवा ही धर्म है’ — को आगे बढ़ाने की हमारी एक विनम्र कोशिश है।”

प्रवेश वर्मा ने आगे कहा “पिताजी के लिए राजनीति सत्ता का माध्यम नहीं, सेवा का साधन थी। जब आज हम इन ज़रूरतमंदों को सहायक उपकरण दे रहे हैं, तो ऐसा लगता है कि उनकी आत्मा हमारे साथ है और हमें सही राह दिखा रही है। यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उनके अधूरे कार्यों को पूरा करने की दिशा में एक संकल्प है।”

इस वितरण शिविर में व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, छड़ी, वॉकर आदि जीवन सहायक उपकरण नि:शुल्क वितरित किए गए। जिस आत्मीयता और सम्मान के साथ लोग इस आयोजन में उपस्थित हुए, वह दर्शाता है कि साहिब सिंह वर्मा जी आज भी लोगों के हृदय में जीवित हैं।

उनका योगदान केवल एक राजनेता तक सीमित नहीं था। वे एक शिक्षाविद्, समाज सुधारक, और ऐसे नेता थे जिन्होंने ग्रामीण भारत और नगरीय प्रशासन के बीच सेतु का कार्य किया। वे मानते थे कि राजनीति सत्ता की दौड़ नहीं, परिवर्तन का माध्यम होनी चाहिए।

आज, उनके जाने के वर्षों बाद भी साहिब सिंह वर्मा जी हर उस गली, हर उस विद्यालय, हर उस किसान, और हर उस नवयुवक के दिल में जीवित हैं जिसे उन्होंने कभी छुआ था — अपने कार्यों, अपनी सोच और अपनी सादगी से।

जैसे ही पुष्पांजलि अर्पित की गई और सहायक उपकरणों का वितरण हुआ, एक बात बिल्कुल स्पष्ट थी —
दिल्ली देहात ने अपना नेता नहीं खोया है।
उसके विचार आज भी जीवित हैं, उसका रास्ता आज भी रोशन है, और प्रवेश साहिब सिंह जी उसी आत्मा और संकल्प के साथ उस ज्योति को आगे बढ़ा रहे हैं।

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