यूपी में अपराधियों पर सबसे बड़ा शिकंजा, 48 घंटे में 35 एनकाउंटर से मचा हड़कंप

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लखनऊ , 09 मई 2026 । उत्तर प्रदेश पुलिस में अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस ने बीते 48 घंटों में बड़ा ऑपरेशन चलाते हुए 35 एनकाउंटर किए। इस कार्रवाई में 3 अपराधियों के मारे जाने, 36 के घायल होने और 60 से ज्यादा आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। इसे हाल के वर्षों में अपराधियों के खिलाफ सबसे बड़े पुलिस एक्शन में से एक माना जा रहा है।

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार 6 और 7 मई को मुजफ्फरनगर, हरदोई, मथुरा, बरेली, गोंडा, इटावा, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी, शामली, वाराणसी, फतेहपुर, कौशांबी, अमरोहा, रायबरेली, जौनपुर और मऊ समेत कई जिलों में मुठभेड़ हुईं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, ज्यादातर मामलों में आरोपियों ने भागने की कोशिश में पुलिस टीम पर गोली चलाई, जिसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई की। जवाबी फायरिंग में अधिकतर संदिग्धों के पैरों में गोली लगी। इन मुठभेड़ों में 36 आरोपी घायल हुए, जबकि 20 अन्य को तलाशी अभियानों में बिना चोट के गिरफ्तार किया गया। दो अलग-अलग घटनाओं में चार पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं, जिनकी हालत स्थिर है। पुलिस के अनुसार सबसे ज्यादा 7 मुठभेड़ मुजफ्फरनगर में हुईं, जहां 10 आरोपियों को गोली लगी और 11 अन्य गिरफ्तार किए गए। ये मुठभेड़ लूट, डकैती, मोबाइल छीनने और चोरी के मामलों से जुड़ी थीं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह अभियान राज्य के अलग-अलग जिलों में एक साथ चलाया गया, जहां वांछित अपराधियों, गैंगस्टरों और गंभीर मामलों में शामिल आरोपियों को निशाना बनाया गया। कई स्थानों पर पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें जवाबी कार्रवाई के दौरान अपराधी घायल हुए। अधिकारियों का दावा है कि कई आरोपी हत्या, लूट, रंगदारी और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में वांछित थे।

सूत्रों के मुताबिक अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध हथियार, कारतूस और संदिग्ध सामग्री भी बरामद की गई है। पुलिस का कहना है कि राज्य में अपराध और गैंग नेटवर्क पर नियंत्रण के लिए यह विशेष अभियान आगे भी जारी रहेगा। वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ किया कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई जाएगी।

इन एनकाउंटरों को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। सरकार समर्थकों ने इसे अपराध नियंत्रण की बड़ी सफलता बताया है, जबकि कुछ विपक्षी नेताओं और मानवाधिकार समूहों ने कार्रवाई की निष्पक्षता और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हर कार्रवाई कानून और न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में होनी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों से अपराधियों के खिलाफ आक्रामक पुलिसिंग की रणनीति अपनाई गई है। सरकार इसे कानून व्यवस्था मजबूत करने का कदम बता रही है, जबकि आलोचक पुलिस कार्रवाई में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल पुलिस की यह बड़ी कार्रवाई पूरे राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और नेटवर्क की जांच के आधार पर और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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