UAE का बड़ा दावा, ईरान ने दागे मिसाइल और ड्रोन… मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ा तनाव

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तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन , 08 मई 2026 । संयुक्त अरब अमीरात ने दावा किया है कि ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, जिन्हें उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने हवा में ही रोक दिया। इस दावे के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता गहरा गई है।

इसी बीच अमेरिका ने सीजफायर के बावजूद ईरान पर फिर बमबारी की। अमेरिका ने कहा कि ईरानी सेना ने उसके जंगी जहाजों पर मिसाइल, ड्रोन और छोटी नावों से हमला किया था।

इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान ने डील नहीं की तो अमेरिका आगे भी हमले करेगा।

वहीं, ईरान का दावा है कि अमेरिकी हमले में सैन्य ठिकानों नहीं, नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया। ईरानी सेना ने कहा कि उसने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज स्ट्रेट और चाबहार पोर्ट के पास मौजूद अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाया। ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में उसके तेल टैंकरों को निशाना बनाया।

विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में चल रहा तनाव अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार हाल के महीनों में यूएई ने कई बार दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान से आने वाले मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम किया है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है और स्थिति किसी भी समय और गंभीर रूप ले सकती है।

ईरानी विदेश मंत्री बोले- हमारी मिसाइलें अभी खत्म नहीं हुईं

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि ईरान के मिसाइल भंडार खत्म हो चुके हैं।

अराघची ने कहा कि अमेरिकी CIA की इंटेलिजेंस गलत है। उन्होंने दावा किया कि ईरान का मिसाइल रिजर्व 120% पर है और देश अपनी जनता की रक्षा के लिए 1000% तैयार है।

अराघची ने X पर लिखा, “हर बार जब कूटनीतिक समाधान सामने आता है, अमेरिका सैन्य रास्ता चुनता है। ईरानी कभी दबाव में नहीं झुकेंगे।”

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। अमेरिका और कई पश्चिमी देशों ने क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है, जबकि कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं।

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