ऑनलाइन सट्टेबाजी पर ED का बड़ा एक्शन, दिल्ली-बेंगलुरु समेत 18 ठिकानों पर छापेमारी से मचा हड़कंप

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नई दिल्ली, 08 मई 2026 । देशभर में तेजी से फैल रहे ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा अभियान चलाते हुए दिल्ली, बेंगलुरु समेत कई शहरों में एक साथ छापेमारी की। ईडी की इस कार्रवाई को ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी “सर्जिकल स्ट्राइक” माना जा रहा है। जांच एजेंसी ने 18 अलग-अलग ठिकानों पर रेड डालकर करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन, हवाला नेटवर्क और फर्जी बैंक खातों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। इस दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है, जिनसे लगातार पूछताछ जारी है।

कारर्वाई के दौरान ईडी ने कथित तौर पर जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किये हैं। सूत्रों ने बताया कि यह मामला लगभग 1,000 करोड़ रुपये के कथित ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से संबंधित है। ईडी के बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय ने मेसर्स गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड इसके निदेशकों और मामले से जुड़े कई अन्य आरोपियों के खिलाफ यह कारर्वाई की।

ईडी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये गिरोह ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को फंसाकर करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार चला रहा था। आरोप है कि विदेशी सर्वरों और फर्जी कंपनियों के माध्यम से यह नेटवर्क भारत में सक्रिय था और सोशल मीडिया, मोबाइल ऐप्स तथा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को ऑनलाइन बेटिंग के लिए प्रेरित किया जाता था। एजेंसी को शक है कि इस नेटवर्क का संबंध अंतरराष्ट्रीय हवाला चैनलों से भी हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार छापेमारी के दौरान कई लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन से जुड़े अहम सबूत जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसियों को कई ऐसे खातों की जानकारी मिली है जिनमें पिछले कुछ महीनों में करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ। ईडी अब इन खातों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध फंडिंग की कड़ियों को खंगाल रही है।

बताया जा रहा है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी का यह नेटवर्क क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों के नाम पर लोगों से पैसा लगवाता था। कई मामलों में फर्जी जीत दिखाकर लोगों को बड़ी रकम लगाने के लिए उकसाया जाता था। बाद में निवेशकों और खिलाड़ियों का पैसा अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, जिससे ट्रैकिंग मुश्किल हो सके।

जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म युवाओं को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ साइबर अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रहे हैं। इसी कारण केंद्र सरकार और एजेंसियां ऐसे नेटवर्क पर लगातार शिकंजा कस रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

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