42 साल बाद मिला इंसाफ: हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दो आरोपी दोषी करार

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लखनऊ, 05 मई 2026 । इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 1984 में हुई हत्या के एक मामले में दो लोगों को बरी करने के अधीनस्थ अदालत के 42 साल पुराने फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया है। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार न्याय की जीत हुई। एक बहुचर्चित हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट ने 42 साल बाद अपना फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को दोषी ठहराया है। इस फैसले के साथ ही पीड़ित परिवार को चार दशकों बाद न्याय मिल सका।

पीठ ने निर्देश दिया कि इस मामले में जीवित बचे दोनों दोषियों को हिरासत में लिया जाए और सजा की अवधि पर सुनवाई के लिए 11 मई को अदालत के सामने पेश किया जाए। इस मामले में चार आरोपी थे जिन्हें 1986 में अधीनस्थ अदालत ने ”आत्मरक्षा” के आधार पर बरी कर दिया था। हालांकि, अपील पर सुनवाई के दौरान दो आरोपियों की मौत हो गई, जिसके बाद बाकी बचे दो आरोपियों को उच्च न्यायालय ने दोषी करार दिया है।

मामला कई सालों से अदालत में लंबित था, जहां गवाहों, सबूतों और कानूनी प्रक्रियाओं के चलते सुनवाई लंबी खिंचती रही। अदालत ने सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार करने के बाद यह निर्णय सुनाया। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपियों की संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।

इस फैसले को न्याय व्यवस्था में विश्वास बहाल करने वाला माना जा रहा है। पीड़ित पक्ष ने अदालत के निर्णय पर संतोष जताते हुए कहा कि भले ही न्याय मिलने में लंबा समय लगा, लेकिन आखिरकार सच की जीत हुई।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला इस बात का उदाहरण है कि न्याय प्रक्रिया भले धीमी हो, लेकिन साक्ष्यों के आधार पर अंततः न्याय मिलता है। वहीं, इस फैसले ने न्याय प्रणाली की मजबूती और निष्पक्षता को भी रेखांकित किया है।

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