नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2026 । देश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां आम आदमी पार्टी (आम आदमी पार्टी) के 7 बागी सांसदों को भारतीय जनता पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) में शामिल होने की मंजूरी मिल गई है। राज्यसभा द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, अब ये सातों नेता सदन में भाजपा के सदस्य के रूप में जाने जाएंगे। इस विलय के बाद राज्यसभा में भाजपा के सदस्यों की कुल संख्या बढ़कर 113 हो गई है (जिसमें 5 मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं)।
सूत्रों के अनुसार, ये सांसद लंबे समय से पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट थे और हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद उन्होंने अलग राह चुनने का फैसला लिया। BJP में शामिल होने के बाद इन नेताओं को संगठन में नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना जताई जा रही है।
इस घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है, जबकि BJP के लिए यह संसद के उच्च सदन में अपनी स्थिति और मजबूत करने वाला कदम है। राज्यसभा में संख्या बढ़ने से सरकार को विधेयकों को पास कराने में भी सहूलियत मिल सकती है।
केजरीवाल के लिए बड़ी चुनौती
एक साथ सात सांसदों का पाला बदलना अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के लिए एक गंभीर संकट माना जा रहा है। राज्यसभा चेयरमैन की मंजूरी मिलने का मतलब है कि अब इन सांसदों पर दल-बदल विरोधी कानून के तहत सदस्यता जाने का खतरा भी कम हो गया है, क्योंकि यह एक बड़े सामूहिक गुट का विलय है।
वहीं, विपक्षी दलों ने इस पर सवाल उठाते हुए इसे “राजनीतिक दबाव और जोड़-तोड़ की राजनीति” करार दिया है। AAP ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा है कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि इस सियासी बदलाव का आने वाले समय में संसद और राज्यों की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
