ईरान संघर्ष का असर: चीन के लिए रखी मिसाइलें खर्च, अमेरिकी स्टॉक पर बढ़ा दबाव

Date:

वॉशिंगटन , 24 अप्रैल 2026 ।  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और Iran से जुड़े संघर्षों के बीच एक बड़ा दावा सामने आया है कि United States को अपनी मिसाइल क्षमताओं पर दबाव झेलना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालिया सैन्य कार्रवाइयों में वे मिसाइलें भी इस्तेमाल की गईं जिन्हें संभावित रूप से China जैसे बड़े रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी के लिए रिजर्व रखा गया था। इस युद्ध में अमेरिका ने करीब 1100 लंबी दूरी की स्टील्थ मिसाइलें (JASSM-ER) इस्तेमाल कीं। ये खास तौर पर चीन के खिलाफ इस्तेमाल के लिए बनाई गई थीं।

ईरान के साथ 38 दिन चले युद्ध में अमेरिका ने अपनी कई अहम और महंगी मिसाइलें खर्च कर दीं। इनमें वो मिसाइलें भी शामिल हैं, जो चीन जैसे बड़े देशों से होने वाले संभावित युद्ध के लिए संभालकर रखी गई थीं। अब अमेरिका का हथियार भंडार तेजी से कम हो रहा है।

इसके अलावा 1000 से ज्यादा टॉमहॉक मिसाइलें, 1200 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलें और 1000 से ज्यादा दूसरी स्ट्राइक मिसाइलें भी दागी गईं। इस पूरे युद्ध पर 28 से 35 अरब डॉलर खर्च हुए। यानी हर दिन करीब 1 अरब डॉलर (लगभग 90 अरब रुपए) खर्च हुए।

युद्ध रुके हुए दो हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन अब तक अमेरिका ने यह नहीं बताया कि कुल कितने हथियार इस्तेमाल हुए। मंत्रालय का कहना है कि 13,000 से ज्यादा टारगेट पर हमला किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सैन्य ऑपरेशनों और उच्च-तकनीकी हथियारों के उपयोग से अमेरिका के मिसाइल स्टॉक पर असर पड़ा है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो भविष्य में बड़े स्तर के किसी संघर्ष के लिए तैयारी प्रभावित हो सकती है।

क्यों बढ़ रही चिंता?

  • तेज खपत: आधुनिक युद्ध में प्रिसिजन-गाइडेड मिसाइलों का उपयोग बहुत अधिक हो रहा है।
  • रीप्लेनिशमेंट में समय: नई मिसाइलों का उत्पादन और तैनाती एक लंबी प्रक्रिया है।
  • रणनीतिक संतुलन: चीन जैसे देशों के साथ संभावित तनाव को देखते हुए स्टॉक बनाए रखना जरूरी माना जाता है।

रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, यह स्थिति अमेरिका को अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए प्रेरित कर सकती है। साथ ही, सहयोगी देशों के साथ सैन्य सहयोग और संसाधनों के साझा उपयोग पर भी जोर बढ़ सकता है।

हालांकि, आधिकारिक स्तर पर इस तरह के दावों की पुष्टि सीमित ही होती है, लेकिन यह मुद्दा वैश्विक रणनीतिक संतुलन और रक्षा तैयारियों को लेकर नई बहस जरूर छेड़ रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

ईद 2027 पर धमाका: सलमान खान की नई फिल्म होगी रिलीज

नई दिल्ली, 24 अप्रैल 2026 । बॉलीवुड के सुपरस्टार...

ओलिंपिक-कॉमनवेल्थ के बाद अब 2038 एशियन गेम्स की तैयारी

नई दिल्ली, भारत अब वैश्विक खेल आयोजनों की मेजबानी...