‘मातृशक्ति ही सनातन धर्म की असली ध्वजवाहक’: जयेंद्र रमोला का बयान,

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ऋषिकेश,  04 अप्रैल 2026 । जयेन्द्र रमोला ने सनातन धर्म में महिलाओं की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति ही सनातन धर्म की वास्तविक ध्वज वाहक है, क्योंकि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने में महिलाओं की भूमिका सबसे अहम रही है। मातृशक्तियों को सशक्त और संगठित करना ही समिति का मुख्य उद्देश्य है। ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर समाज में एक मजबूत भूमिका निभा सकें। समाजसेवी हर्षपति सेमवाल ने कहा कि समिति लगातार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने तथा उनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

जयेन्द्र रमोला के अनुसार, परिवार और समाज में संस्कारों की नींव महिलाओं द्वारा ही रखी जाती है। बच्चों को नैतिक मूल्य, धार्मिक परंपराएं और सांस्कृतिक पहचान देने में मातृशक्ति का योगदान अतुलनीय है, जिससे सनातन धर्म की निरंतरता बनी रहती है।

उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास से लेकर वर्तमान तक महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है और धर्म, संस्कृति व समाज के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में उन्हें सम्मान और समान अवसर देना समाज की जिम्मेदारी है।

इस बयान के बाद सामाजिक और धार्मिक क्षेत्रों में चर्चा तेज हो गई है, जहां नारी शक्ति की भूमिका और महत्व पर फिर से जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि समाज के समग्र विकास के लिए महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण बेहद जरूरी है, क्योंकि वे न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

कुल मिलाकर, Jayendra Ramola का यह बयान मातृशक्ति के महत्व और सनातन परंपराओं में उनके योगदान को रेखांकित करता है।

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