नई दिल्ली , 18 मार्च 2026 । आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा ने हाल ही में बैंकिंग सिस्टम को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि आज के दौर में बैंक अकाउंट्स लोगों को वित्तीय सुरक्षा देने के बजाय तनाव का कारण बनते जा रहे हैं। उनका यह बयान देश में बढ़ती डिजिटल बैंकिंग, फ्रॉड और जटिल प्रक्रियाओं के संदर्भ में काफी अहम माना जा रहा है।
उन्होंने केंद्र सरकार से छोटे बैंक खातों पर इस तरह के शुल्क समाप्त करने का आग्रह करते हुए कहा कि ये शुल्क गरीबों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों पर असमान रूप से असर डालते हैं।
राज्यसभा में चड्ढा ने कहा कि पिछले तीन सालों में बैंकों ने उन ग्राहकों से जुर्माने के तौर पर लगभग 19 हजार करोड़ रुपए जमा किए हैं, जो अपने बैंक खातों में जरूरी न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने में नाकाम रहे। इस कुल रकम में से पब्लिक सेक्टर के बैंकों ने लगभग 8 हजार करोड़ वसूले, जबकि प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने इस दौरान लगभग 11 हजार करोड़ रुपए वसूले।
राघव चड्ढा ने कहा कि डिजिटल ट्रांजैक्शन के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। आम लोग अपनी मेहनत की कमाई बैंक में सुरक्षित समझते हैं, लेकिन फिशिंग, OTP फ्रॉड और ऑनलाइन स्कैम के कारण उनकी बचत खतरे में पड़ जाती है।
उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि बैंकिंग सिस्टम में कई प्रक्रियाएं इतनी जटिल हो गई हैं कि आम उपभोक्ता को अपने ही पैसे तक पहुंचने में दिक्कत होती है। केवाईसी अपडेट, अकाउंट फ्रीज, ट्रांजैक्शन लिमिट जैसी समस्याएं लोगों के लिए मानसिक तनाव का कारण बन रही हैं।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
राघव चड्ढा ने कहा कि अगर किसी ग्राहक के साथ बैंकिंग फ्रॉड होता है, तो केवल उपभोक्ता को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने बैंकों और संबंधित संस्थाओं की जवाबदेही तय करने की मांग की, ताकि ग्राहकों का भरोसा बहाल हो सके।
उन्होंने सुझाव दिया कि बैंकिंग सिस्टम को और सरल, पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए। साथ ही, साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, ग्राहक जागरूकता बढ़ाने और शिकायत निवारण तंत्र को तेज करने की जरूरत है।
आम लोगों के लिए क्या संदेश?
यह बयान आम उपभोक्ताओं के लिए भी एक चेतावनी है कि वे डिजिटल लेन-देन करते समय सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या मैसेज से बचें।
कुल मिलाकर, राघव चड्ढा का यह बयान बैंकिंग सिस्टम में सुधार की जरूरत और उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस को सामने लाता है।
