पंजाब विधान सभा ने क्रशर रेगुलेशन संशोधन बिल 2026 पारित

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पंजाब , 17 मार्च 2026 । पंजाब विधान सभा ने हाल ही में “Punjab Regulation of Crusher Units, Stockists and Retailers (Amendment) Bill, 2026” को बहुमत से पारित कर दिया है। यह विधेयक राज्य में लंबे समय से चल रही अवैध खनन गतिविधियों पर रोक लगाने, राजस्व बढ़ाने और पूरे खनन तंत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है।

नई व्यवस्थाओं के तहत छोटे खनिजों से संबंधित लेन-देन प्रक्रियाओं की डिजिटल ट्रैकिंग भी शुरू की जा रही है ताकि अनियमितताओं पर रोक लग सके और सप्लाई चेन में जवाबदेही बढ़ाई जा सके। बरिंदर कुमार गोयल ने ज़ोर देकर कहा कि नए संशोधनों में उल्लंघनों और अवैध खनन गतिविधियों को रोकने के लिए कड़ी दंडात्मक प्रावधान शामिल किए गए हैं।

इस संशोधन बिल को खनन एवं जल संसाधन मंत्री द्वारा सदन में पेश किया गया, जिसमें क्रशर यूनिट्स, स्टॉकिस्ट और रिटेलर्स के संचालन पर कड़े नियम लागू करने का प्रावधान किया गया है। नई व्यवस्था के तहत सभी क्रशर यूनिट्स का अनिवार्य पंजीकरण किया जाएगा और उन्हें हर महीने अपनी गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी।

सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक है उत्पादन की निगरानी के लिए बिजली खपत (Electricity Consumption) के आंकड़ों का उपयोग। इससे सरकार को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि घोषित उत्पादन और वास्तविक उत्पादन में कहीं अंतर तो नहीं है, जिससे अवैध खनन और चोरी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

इसके अलावा, खनिजों के पूरे सप्लाई चेन—खनन से लेकर बिक्री तक—को ट्रैक करने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। इससे हर लेन-देन की निगरानी संभव होगी और जवाबदेही बढ़ेगी।

विधेयक में सख्त दंडात्मक प्रावधान भी शामिल किए गए हैं, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वाले क्रशर मालिकों और व्यापारियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए नए नियमों में पर्यावरणीय अनुपालन (Environmental Compliance) को भी अनिवार्य बनाया गया है। सदन में इस बिल को लेकर तीखी बहस भी देखने को मिली, जहां विपक्ष ने राज्य में जारी अवैध खनन और राजस्व नुकसान का मुद्दा उठाया। वहीं सरकार ने आश्वासन दिया कि नए कानून के जरिए “माइनिंग माफिया” पर लगाम कसने के साथ-साथ राज्य की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

कुल मिलाकर, यह संशोधन बिल पंजाब में खनन क्षेत्र को अधिक संगठित, पारदर्शी और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक अहम सुधार माना जा रहा है। इससे न केवल अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी बल्कि वैध कारोबार करने वालों को भी समान अवसर मिलेगा और राज्य के राजस्व में वृद्धि की उम्मीद है।

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