चांदी तीन दिन में ₹1.60 लाख गिरी, ₹2.41 लाख/किलो हुई

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नई दिल्ली, 02 फ़रवरी 2026 । चांदी की कीमतों में महज तीन दिनों के भीतर ₹1.60 लाख प्रति किलो की तेज गिरावट ने सर्राफा बाजार, निवेशकों और औद्योगिक उपभोक्ताओं—तीनों को चौंका दिया है। कीमत गिरकर लगभग ₹2.41 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है, जो हाल के ऊंचे स्तरों से बड़ी गिरावट मानी जा रही है। यह बदलाव केवल घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार संकेतों, डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों की दिशा और निवेशकों की मुनाफावसूली से जुड़ा हुआ है।

बजट पेश होने के एक दिन बाद यानी आज, 2 फरवरी को गोल्ड और सिल्वर मार्केट में लगातार तीसरे दिन गिरावट है। आज यानी 2 फरवरी को वायदा बाजार में चांदी करीब 23 हजार रुपए (9%) गिर गई।

1 किलो चांदी का भाव 2.41 लाख रुपए पर आ गया। सोने में भी करीब 7 हजार रुपए (6%) की गिरावट है। 10 ग्राम सोना 1.40 लाख रुपए पर आ गया है।

सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव माना जा रहा है। चांदी एक कीमती धातु होने के साथ-साथ औद्योगिक धातु भी है, जिसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, बैटरी, मेडिकल उपकरण और आभूषणों में होता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता या औद्योगिक मांग में धीमापन आने पर चांदी पर सीधा असर पड़ता है। यदि निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से पैसा निकालते हैं या कमोडिटी बाजार में बिकवाली बढ़ती है, तो कीमतों में तेज गिरावट देखी जाती है।

डॉलर इंडेक्स और ब्याज दरों का प्रभाव भी अहम है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो डॉलर में कीमत तय होने वाली धातुएं अन्य मुद्राओं के निवेशकों के लिए महंगी पड़ती हैं, जिससे मांग घटती है। इसके अलावा, यदि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा रखते हैं, तो निवेशक सोना-चांदी जैसी नॉन-इंटरेस्ट एसेट्स से पैसा निकालकर फिक्स्ड इनकम साधनों में लगाना पसंद करते हैं। इससे कीमती धातुओं में बिकवाली बढ़ती है।

मुनाफावसूली (Profit Booking) भी इस गिरावट का बड़ा कारण हो सकती है। हाल के महीनों में चांदी की कीमतों में तेज उछाल आया था, जिससे बड़े निवेशकों और ट्रेडर्स ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफा बुक किया। जब बड़ी मात्रा में बिकवाली एक साथ आती है, तो कीमतें तेजी से नीचे फिसलती हैं।

घरेलू बाजार पर असर भी साफ दिख रहा है। ज्वेलर्स के लिए यह गिरावट खरीदारी का मौका बन सकती है, लेकिन निवेशकों के लिए यह अस्थिरता चिंता का विषय है। वायदा बाजार (फ्यूचर्स) में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, जिससे छोटे निवेशकों को जोखिम समझकर कदम उठाना होगा। शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में कीमतों की नरमी उपभोक्ताओं को राहत दे सकती है।

औद्योगिक मांग का पहलू भी महत्वपूर्ण है। सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर चांदी के बड़े उपभोक्ता हैं। यदि वैश्विक उत्पादन या मांग के आंकड़ों में कमजोरी आती है, तो यह संकेत देता है कि भविष्य की मांग धीमी हो सकती है—जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।

हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि कीमती धातुओं में गिरावट हमेशा स्थायी नहीं होती। भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अस्थिरता या निवेशकों का सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव दोबारा कीमतों को सहारा दे सकता है। इसलिए मौजूदा गिरावट को कई निवेशक “करेक्शन” के रूप में भी देख रहे हैं।

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