पुणे में शिवसेना उम्मीदवार ने दूसरे कैंडिडेट का फॉर्म निगला

Date:

नई दिल्ली, 01 जनवरी 2026 । महाराष्ट्र के पुणे में चुनावी प्रक्रिया के दौरान एक अजीबोगरीब और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां शिवसेना के एक उम्मीदवार पर आरोप है कि उसने दूसरे उम्मीदवार का नामांकन फॉर्म ही निगल लिया। इस घटना के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक महकमे तक में हड़कंप मच गया और चुनावी मर्यादा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

महाराष्ट्र में नगर निगम चुनाव से पहले एक हैरान करने वाला मामला सामने आया। पुणे में शिवसेना के एक उम्मीदवार पर अपनी ही पार्टी के कैंडिडेट का A-B फॉर्म फाड़कर निगल लिया।

घटना बुधवार को धनकवड़ी सहकारनगर वार्ड कार्यालय में हुई। बाद में भारती विद्यापीठ पुलिस स्टेशन में शिवसेना के उम्मीदवार उद्धव कांबले के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

पुणे में वार्ड नंबर 34 के लिए शिवसेना के दो उम्मीदवारों को A-B फॉर्म जारी किए गए थे। इसके बाद शिवसेना के उम्मीदवारों कांबले और मच्छिंद्र धवले के बीच तीखी बहस हुई।

पुलिस के मुताबिक बहस के दौरान, कांबले ने धवले का A-B फॉर्म छीन लिया, उन्हें फाड़ दिया और टुकड़े निगल लिए।

फॉर्म A और B जरूरी दस्तावेज हैं जिनके तहत एक राजनीतिक पार्टी किसी खास नॉमिनी को चुनाव में अपना उम्मीदवार घोषित करती है।

BMC समेत 29 नगर निगमों के चुनाव 15 जनवरी को होने हैं, काउंटिंग अगले दिन होगी। नॉमिनेशन प्रक्रिया 23 दिसंबर को शुरू हुई थी, जो 30 दिसंबर को खत्म हुई।

2 जनवरी नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख है। उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट 3 जनवरी को जारी की जाएगी।

दूसरे उम्मीदवार और उसके समर्थकों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला बताया है। उनका आरोप है कि इस तरह की हरकत चुनाव लड़ने के अधिकार को बाधित करने की कोशिश है। उन्होंने तुरंत चुनाव अधिकारियों से शिकायत की और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। वहीं, प्रशासन ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट तलब कर ली है।

राजनीतिक दलों ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं। विपक्षी पार्टियों ने शिवसेना पर निशाना साधते हुए कहा कि यह घटना बताती है कि कुछ लोग हार के डर से किस हद तक जा सकते हैं। वहीं, शिवसेना की ओर से कहा गया है कि मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और सच्चाई जांच के बाद सामने आएगी। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह चुनावी नियमों और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखती है।

कुल मिलाकर, पुणे की यह घटना चुनावी इतिहास में एक अनोखे विवाद के रूप में दर्ज हो गई है। अब सबकी नजर चुनाव आयोग और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं और चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता को कैसे बनाए रखा जाएगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related