- संविधान केवल किताब नहीं, यह हम सबके जीवन का मार्गदर्शन
- अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को समझें और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाएँ
- 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने संविधान को अपनाया, 2015 से मनाया जा रहा संविधान दिवस
नई दिल्ली, 26 नवंबर 2025 । भारत रत्न डॉ. बी आर अम्बेडकर जी संविधान बनाने वाली ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन थे। उन्होंने देश को एक ऐसा संविधान दिया जिसने भारत को संसदीय लोकतंत्र, संघीय ढाँचा, स्वतंत्र न्यायपालिका और मौलिक अधिकारों वाला राष्ट्र बनाने का आधार दिया। यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी योजनाओं और संकल्पों के केंद्र में संविधान को रखा और यह सन्देश दिया कि “भारत का संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं बल्कि राष्ट्र-निर्माण का मार्गदर्शक ग्रंथ है।“ आज दिल्ली सरकार भी विकसित दिल्ली निर्माण में ‘संविधान, समानता और सामाजिक न्याय’ को योजनाओं का केंद्र बना आगे बढ़ रही है। दिल्ली सरकार के समाज कल्याण मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह ने बुधवार को संविधान दिवस के अवसर पर यह बात इंदिरा गांधी दिल्ली महिला तकनीकि विश्वविद्यालय में आयोजित हुए कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कही।
रविन्द्र इन्द्राज ने कहा कि आज तकनीक और डिजिटल ज्ञान स्रोतों के माध्यम से संविधान को पढ़ने–समझने के अनेक माध्यम उपलब्ध हैं, पर सबसे महत्वपूर्ण है संविधान के प्रति हमारी निष्ठा, कर्तव्यबोध और समाज के प्रति समर्पण।
रविन्द्र इन्द्राज ने संविधान में निहित प्रमुख अनुच्छेद जैसे अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (स्वतंत्रता के अधिकार), अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता), अनुच्छेद 32 (मौलिक अधिकारों का संरक्षण), अनुच्छेद 51(A) (नागरिकों के मूल कर्तव्य), अनुच्छेद 15 (सामाजिक न्याय) का उल्लेख करते हुए कहा कि इन अधिकारों और कर्तव्यों का वास्तविक क्रियान्वयन तभी संभव है जब समाज, ब्यूरोक्रेसी, संस्थाएँ और नागरिक समान भाव से इसके प्रति जागरूक और उत्तरदायी रहें।

समाज कल्याण मंत्री ने कहा कि आज़ादी के बाद केंद्र में लम्बे समय तक रही सरकार में संविधान, लोकतंत्र और बाबा साहेब अम्बेडकर के विचारों की हमेशा उपेक्षा हुई। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल जी का उदाहरण देते हुए कहा कि 563 रियासतों का एकीकरण कर भारतीय संविधान और राष्ट्र की एकता के लिए उन्होंने महान योगदान दिया। प्रधानमंत्री पद के लिए उन्हें ज्यादा वोट मिले लेकिन उस समय के प्रमुख दल ने इसकी अवहेलना की और कम वोट पाने वाले को प्रधानमंत्री बनाया, देश में लम्बे समय तक संविधान का पालन सही तरीके से न हो पाने से गरीब, वंचित और महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाने का सपना अधूरा रह गया।
रविन्द्र इन्द्राज ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में समानता और सामाजिक न्याय की उस अवधारणा को साकार किया है, जो बाबा साहेब अम्बेडकर के सपनों का भारत था, साथ ही महिला सशक्तिकरण की दिशा में उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य की चुनौतियों को हल करने के साथ ही संविधान में संशोधन कर महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33 फीसदी आरक्षण दिया गया, आज की सशक्त नारी ने भारतीय सेना का हिस्सा बन ऑपरेशन सिंदूर में पराक्रम दिखाया और आतंकियों के कैंपों को तबाह किया।
कैबिनेट मंत्री ने इस अवसर पर छात्राओं और उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि संविधान केवल किताब नहीं, यह हम सबके जीवन का मार्गदर्शन है। अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएँ।
इस अवसर पर कुलपति रंजना झा, विश्वविद्यालय के शिक्षक और स्टाफ, सोशल वेलफेयर डायरेक्टर यश चौधरी, संविधान विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
