गोल्ड खरीदने की अपील पर राजनीति गरमाई! पीएम मोदी के बयान पर राहुल गांधी का बड़ा हमला

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नई दिल्ली, 11 मई 2026 । देश में बढ़ती महंगाई, निवेश और आर्थिक अस्थिरता के बीच सोने की खरीदारी को लेकर पीएम मोदी की अपील अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। प्रधानमंत्री द्वारा लोगों से अत्यधिक गोल्ड खरीदने से बचने और निवेश के वैकल्पिक विकल्प अपनाने की सलाह देने के बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे सरकार की आर्थिक नाकामी बताते हुए कहा कि जनता का सोने की ओर झुकाव देश की कमजोर होती आर्थिक स्थिति और लोगों के घटते भरोसे का संकेत है।

राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा-

प्रधानमंत्री के इस बयान के कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर पीएम मोदी पर पलटवार किया है। राहुल ने पीएम मोदी की अपील को जनता पर जिम्मेदारी थोपने वाला कदम बताया। राहुल गांधी ने लिखा कि यह सरकार की 12 सालों की नाकामी का सबूत है।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आम जनता बैंकिंग व्यवस्था, शेयर बाजार और अन्य निवेश विकल्पों को लेकर असुरक्षित महसूस कर रही है, इसलिए लोग पारंपरिक रूप से सोने में निवेश को सुरक्षित मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि अर्थव्यवस्था मजबूत होती और रोजगार तथा आय में स्थिरता होती, तो लोगों को अपनी बचत सुरक्षित रखने के लिए केवल गोल्ड पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। कांग्रेस ने इसे सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता से जोड़ते हुए केंद्र पर सवाल उठाए।

वहीं भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री का उद्देश्य देश में उत्पादक निवेश को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना है। भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ता देशों में शामिल है और भारी मात्रा में सोने के आयात से व्यापार घाटे पर असर पड़ता है। सरकार लंबे समय से डिजिटल निवेश, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड और अन्य वित्तीय योजनाओं को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अस्थिरता, युद्ध जैसी परिस्थितियां और बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान लोग सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर आकर्षित होते हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गोल्ड की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। भारत में त्योहारों और शादियों के मौसम के कारण भी सोने की मांग हमेशा मजबूत रहती है।

इस पूरे विवाद ने आर्थिक नीति बनाम राजनीतिक बयानबाजी की नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और निवेश के नए रास्तों को बढ़ावा देने की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे जनता के आर्थिक डर और सरकार पर घटते भरोसे का संकेत बता रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा संसद से लेकर चुनावी मंचों तक गूंज सकता है।

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