अमेरिका में भारतीय राजनीति की गूंज! लोकसभा सीटों पर थरूर बनाम तेजस्वी सूर्या के बीच छिड़ी तीखी बहस

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नई दिल्ली, 11 मई 2026 ।भारतीय राजनीति का असर अब अंतरराष्ट्रीय मंचों तक दिखाई देने लगा है। अमेरिका में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लोकसभा सीटों की संभावित बढ़ोतरी को लेकर नेताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण के मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए चीन का उदाहरण दिया और केंद्र सरकार की नीतियों पर तंज कसा। इसके जवाब में भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने पलटवार करते हुए कांग्रेस की सोच और पुराने राजनीतिक रवैये को जिम्मेदार ठहराया।

क्या बोले थरूर?
Shashi Tharoor ने कहा कि अमेरिका की जनसंख्या 1929 के बाद तीन गुना बढ़ चुकी है, लेकिन वहां प्रतिनिधि सभा के सदस्यों की संख्या अब भी 435 ही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बहस और चर्चा जरूरी होती है, जबकि 850 सांसदों वाले सदन में यह संभव नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना गलत है और अगर सरकार चाहे तो मौजूदा संसद में ही एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर सकती है। उन्होंने कहा, ”आपको बोलने, बहस करने या किसी भी बात पर चर्चा करने का मौका नहीं मिलेगा। 850 तो एक मज़ाक है।’

भाजपा नेताओं ने किया पलटवार

तेजस्वी सूर्या ने थरूर के बयान का कड़ा जवाब देते हुए कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की तुलना चीन जैसे एकदलीय शासन वाले देश से करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान और लोकतांत्रिक ढांचा जनता की वास्तविक भागीदारी पर आधारित है और सीटों का पुनर्निर्धारण देश की बदलती जनसंख्या और प्रतिनिधित्व की जरूरतों के अनुसार होना चाहिए। सूर्या ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक डर और भ्रम फैलाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।

लोकसभा सीटों के परिसीमन का मुद्दा आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति का बड़ा विषय बन सकता है। दक्षिण और उत्तर भारत के बीच प्रतिनिधित्व संतुलन को लेकर पहले भी बहस होती रही है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों को नुकसान नहीं होना चाहिए, जबकि दूसरी ओर तेजी से बढ़ती आबादी वाले राज्यों को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना जरूरी है।

अमेरिका में हुई इस बहस ने साफ कर दिया है कि भारतीय राजनीति अब वैश्विक मंचों पर भी खुलकर सामने आ रही है। सोशल मीडिया पर भी दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच जमकर बहस देखने को मिली। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिसीमन और लोकसभा सीटों का मुद्दा भविष्य में केंद्र और राज्यों के संबंधों पर बड़ा असर डाल सकता है।

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