नई दिल्ली, 25 अप्रैल 2026 । राजधानी दिल्ली की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जहां आम आदमी पार्टी (आम आदमी पार्टी) को तगड़ा झटका लगा है। दिल्ली चुनाव में हार के बाद पार्टी के 7 सांसदों ने इस्तीफा दे दिया, जिससे संगठन के भीतर गहरी असंतोष की स्थिति उजागर हो गई है।
‘आप’ छोड़ने वाले सांसदों में से एक संदीप पाठक ने कहा कि उनकी शैक्षणिक यात्रा कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से शुरू हुई, जिसके बाद वह ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और बाद में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) चले गये थे। पाठक 2022 में ‘आप’ में शामिल हुए थे और उसी वर्ष राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। उन्हें पार्टी का गुजरात प्रभारी और पंजाब का सह-प्रभारी भी नियुक्त किया गया। सबसे बड़ा झटका लगा जब राघव चड्ढा समेत उसके सात राज्यसभा सदस्यों ने पार्टी छोड़ दी। चड्ढा के अलावा ‘आप’ से इस्तीफा देने वाले अन्य राज्यसभा सदस्यों में संदीप पाठक, पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रम साहनी शामिल हैं। चड्ढा ने पाठक और मित्तल के साथ संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्यों में से दो-तिहाई ने पार्टी छोड़ दी है और वे एक गुट के रूप में भाजपा में शामिल होंगे।
सूत्रों के मुताबिक, चुनावी हार के बाद पार्टी की रणनीति, नेतृत्व और अंदरूनी फैसलों को लेकर असहमति लगातार बढ़ रही थी। कई नेताओं का मानना था कि जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ कमजोर हुई है और जनता से जुड़ाव पहले जैसा नहीं रहा। इसी असंतोष के चलते यह बड़ा कदम उठाया गया।
पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व पर भी सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों ने इसे “नेतृत्व की विफलता” करार देते हुए कहा कि पार्टी अब बिखराव की ओर बढ़ रही है।
हालांकि, ‘आप’ की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा गया है कि पार्टी मजबूत है और कुछ नेताओं के जाने से संगठन पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। पार्टी ने यह भी दावा किया कि जल्द ही संगठन में फेरबदल कर स्थिति को संभाल लिया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में दिल्ली की सियासत पर बड़ा असर डाल सकता है। यदि असंतोष और बढ़ता है, तो पार्टी के लिए अपनी पकड़ बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
