राहुल गांधी का बड़ा सवाल—₹16,500 करोड़ के ठेकों में किसे मिला काम,

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नई दिल्ली,  07 अप्रैल 2026 ।कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ₹16,500 करोड़ के सरकारी ठेकों को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि इन बड़े प्रोजेक्ट्स में किन-किन वर्गों को काम मिला और क्या इसमें सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया गया।

उन्होंने ने कहा कि नीति के तहत सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया के तहत 25 प्रतिशत खरीद एमएसएमई से होनी चाहिए, जिसमें से चार प्रतिशत खरीद दलित और आदिवासी उद्यमियों से किया जाना निर्धारित है, लेकिन जब बात सबसे बड़े और लाभकारी ठेकों और सार्वजनिक कार्यों की आती है, तो सरकार कहती है कि यह “अनिवार्य” नहीं है। रायबरेली से लोकसभा सदस्य ने दावा किया, ”यह केवल एक प्रशासनिक कमी नहीं है। यह मोदी सरकार की नीतियों के जरिये जानबूझकर बनाई गई बहिष्कार की व्यवस्था है जो सामाजिक और आर्थिक न्याय को कमजोर करती है।” राहुल गांधी ने कहा कि सवाल सीधा है कि बहुजन उद्यमियों को देश के सबसे बड़े सार्वजनिक ठेकों से बाहर क्यों रखा जा रहा है?

राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि देश में विकास के नाम पर बड़े पैमाने पर ठेके दिए जा रहे हैं, लेकिन यह जानना जरूरी है कि इन अवसरों का लाभ किन लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने खास तौर पर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और छोटे उद्यमियों की भागीदारी पर सवाल उठाया।

उनका कहना है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन ठेकों में कितनी हिस्सेदारी वंचित और पिछड़े वर्गों को मिली है। उन्होंने इसे ‘सामाजिक न्याय’ से जोड़ते हुए कहा कि यदि बड़े प्रोजेक्ट्स में समान अवसर नहीं दिए जा रहे, तो यह असमानता को बढ़ावा देगा।

राजनीतिक तौर पर इस मुद्दे को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर रोजगार, आर्थिक अवसर और सामाजिक बराबरी से जुड़ा है। राहुल गांधी का यह बयान सरकार को घेरने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब विकास और रोजगार के मुद्दे प्रमुख राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं।

वहीं, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन सकता है, जहां पारदर्शिता और अवसरों के समान वितरण पर जोर रहेगा।

यह बहस इस बात को भी रेखांकित करती है कि देश में विकास के साथ-साथ सामाजिक न्याय और समावेशिता को सुनिश्चित करना कितना जरूरी है।

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