नीतीश कुमार के दिल्ली कूच से बदले समीकरण, Rajiv Ranjan Singh और Sanjay Jha की भूमिका पर सवाल,

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पटना , 19 मार्च 2026 । बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Nitish Kumar के दिल्ली कूच के बाद पार्टी और सत्ता के अंदर नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं। इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा Rajiv Ranjan Singh (ललन सिंह) और Sanjay Jha की भूमिका को लेकर हो रही है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नई भूमिका यानि राज्यसभा सदस्य बन जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे बिहार की राजनीति से सम्मानजनक विदाई मानी जा रही है। इस विदाई के मर्म में नीतीश कुमार का क्या होगा? यह चर्चा का विषय नहीं है, चर्चा का विषय यह है कि नीतीश कुमार की ‘भूंजा’ पार्टी का क्या होगा? अब बिहार की राजनीति में मोहरे कैसे और किसके द्वारा बिछाए जाएंगे, यह अहम चर्चा का विषय बना हुआ है। चलिए क्या-क्या बदलाव संभव है, जानते हैं।

ललन सिंह और संजय झा का क्या होगा?

राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं पर यकीन करें तो सत्ता में चेहरा बदलने का जिम्मा अगर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और संजय झा का था, तो वह पूरा हो चुका है। बिहार के नेतृत्व के पूरे ही बदलने का संकेत मिल रहे हैं। हालांकि एक चर्चा यह है कि कार्य पूरा तो फिर ललन सिंह की जरूरत भी पूरी। लेकिन राजनीति का एक वर्ग कहता है कि जदयू के नेता ललन सिंह जब राजद सुप्रीमो लालू यादव को ‘जंगल राज’ का प्रतीक नहीं सामाजिक न्याय का मसीहा कह सकते हैं, वह किसी भी राजनीतिक परिस्थित में खुद को ढाल सकते हैं। संजय झा तो कार्यकारी अध्यक्ष हैं ही, उनकी देख-रेख में निशांत कुमार की राजनीति में रंग रोगन लगेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली में सक्रियता बढ़ने के बाद Nitish Kumar पार्टी के भीतर नई जिम्मेदारियों का बंटवारा कर सकते हैं। ऐसे में Rajiv Ranjan Singh और Sanjay Jha के प्रभाव में बदलाव देखने को मिल सकता है।

वहीं दूसरी ओर Vijay Kumar Chaudhary का कद फिलहाल मजबूत बना हुआ है। संगठन और सरकार दोनों में उनकी पकड़ को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले समय में भी उनकी भूमिका अहम बनी रहेगी।

यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी के अंदर संतुलन बनाए रखने के लिए नेतृत्व बड़े बदलावों से बच सकता है और अनुभवी नेताओं को ही जिम्मेदारी देता रहेगा। हालांकि, बदलते राजनीतिक हालात में किसी भी वक्त नए फैसले सामने आ सकते हैं।

कुल मिलाकर, Nitish Kumar के दिल्ली कूच ने बिहार की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है, जहां हर नेता की भूमिका पर नजर रखी जा रही है।

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