कांग्रेस नेता बोलीं- राहुल, प्रियंका का बोलने का तरीका अलग

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नई दिल्ली, 13 दिसंबर 2025 । कांग्रेस की एक वरिष्ठ नेता के बयान से पार्टी के भीतर नेतृत्व शैली और संवाद के तरीके को लेकर नई बहस छिड़ गई है। नेता ने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के बोलने और अपनी बात रखने का तरीका अलग-अलग है, और यही उनकी व्यक्तिगत पहचान को दर्शाता है। इस टिप्पणी को कांग्रेस के आंतरिक विमर्श और भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

नेता के अनुसार, राहुल गांधी आमतौर पर नीतिगत मुद्दों, सामाजिक न्याय और संस्थागत सवालों पर विस्तार से अपनी बात रखते हैं। उनका संवाद अधिक वैचारिक और मुद्दा-आधारित होता है, जिसमें वे बेरोजगारी, महंगाई और लोकतांत्रिक संस्थाओं जैसे विषयों को केंद्र में रखते हैं। वहीं प्रियंका गांधी का भाषण अधिक भावनात्मक, सीधा और जनसंवाद से जुड़ा हुआ माना जाता है, जिससे वे कार्यकर्ताओं और आम जनता से तुरंत जुड़ पाती हैं।

कांग्रेस की सीनियर नेता रेणुका चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी एकदम अलग हैं। उनके बोलने का तरीका भी बहुत अलग है। उनकी आपस में तुलना नहीं की जानी चाहिए।

NDTV को दिए इंटरव्यू में रेणुका ने कहा, वे सेब और संतरे की तरह हैं। जिनकी तुलना नहीं की जा सकती और न ही की जानी चाहिए। संसद में दोनों अलग-अलग विषयों पर बोल रहे थे। हालांकि दोनों ने मजबूत से अपनी बात रखी।

कांग्रेस नेता ने आगे कहा, हम इतने स्टीरियोटाइपिकल हैं कि हम एक खास तरह के रिस्पॉन्स की उम्मीद करते हैं और यह वैसा ही होना चाहिए। किसी और तरह से नहीं। अलग-अलग लोग चीजों को अलग-अलग तरह से बताते हैं। मुझे लगता है कि हर कोई अपनी बात पर अड़ा रहा और जो जरूरी था, उसे उठाया।”

रेणुका से जब पूछा गया कि बेहतर स्पीकर कौन है, तो उन्होंने एक नाम बताने से मना कर दिया। यहां एक दूसरे से बेहतर या खराब होने की बात ही नहीं है।

राहुल गांधी ने मंगलवार को लोकसभा में चुनाव सुधार (SIR) पर 28 मिनट की स्पीच दी। कहा कि RSS और BJP देश की संस्थाओं पर कब्जा कर रही हैं। इनमें चुनाव आयोग, ईडी, सीबीआई, आईबी, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट शामिल हैं। इससे साफ है कि बीजेपी चुनाव आयोग को कंट्रोल और निर्देशित (डायरेक्ट) कर रही है। इससे लोकतंत्र को नुकसान हो रहा है।

राहुल की स्पीच के दौरान 5 बार हंगामा हुआ। हरियाणा की वोटर लिस्ट में ब्राजीलियन मॉडल के जिक्र के समय कांग्रेस सांसदों द्वारा मॉडल की तस्वीर दिखाने पर स्पीकर ओम बिरला नाराज हो गए। कहा- ऐसे सदन नहीं चलेगा।

इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि दोनों नेताओं की अलग-अलग शैली कांग्रेस के लिए पूरक साबित हो सकती है। समर्थकों का मानना है कि राहुल की वैचारिक गहराई और प्रियंका की जनसंपर्क क्षमता मिलकर पार्टी को व्यापक आधार दे सकती है। वहीं आलोचक इसे नेतृत्व में स्पष्ट दिशा की कमी से भी जोड़कर देख रहे हैं।

कांग्रेस नेतृत्व के भीतर यह संदेश देने की कोशिश भी मानी जा रही है कि पार्टी में विविधता को कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत के रूप में देखा जाना चाहिए। अलग-अलग वक्ताओं और विचारधाराओं के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाना कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। आने वाले चुनावी माहौल में यह देखना अहम होगा कि पार्टी इन अलग-अलग संवाद शैलियों को किस तरह एक साझा राजनीतिक संदेश में बदलती है।

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