बंगाल में 3 करोड़ से ज्यादा SIR फॉर्म बंटे

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पश्चिम बंगाल, 08 नवम्बर 2025 । पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी किए गए SIR (Socio-Economic Identification of Residents) फॉर्म को लेकर एक बड़ा रिकॉर्ड सामने आया है। अब तक राज्य में 3 करोड़ से अधिक फॉर्म नागरिकों के बीच वितरित किए जा चुके हैं। इस प्रक्रिया का मकसद राज्य की जनकल्याण योजनाओं के लिए सटीक और अद्यतन डेटा तैयार करना है, ताकि लाभार्थियों की पहचान और आवंटन अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सके।

क्या है SIR फॉर्म?

  • यह एक सामाजिक-आर्थिक सर्वे से जुड़ा आधिकारिक दस्तावेज है

  • उद्देश्य: नागरिकों की आय, परिवार संरचना, रोजगार, शिक्षा, सामाजिक स्थिति और सरकारी लाभ से जुड़ी जानकारी एकत्र करना

  • सरकार का दावा है कि इससे कल्याणकारी योजनाओं तक वास्तविक पात्र लोगों की पहुँच तेज और पारदर्शी होगी

देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट का रिवीजन SIR 4 नवंबर से शुरू हो चुकी है। पश्चिम बंगाल में विरोध के बावजूद बूथ लेवल अधिकारियों ने 3.04 करोड़ से ज्यादा फॉर्म बांट दिए हैं।

हालांकि, कूचबिहार के पूर्व एन्क्लेव निवासियों ने लगभग 450 महिलाओं के नाम जिला प्रशासन को सौंपे हैं। उन्हें डर है कि 9 दिसंबर को पब्लिश होने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से उनका नाम छूट सकता है।

इधर, सुप्रीम कोर्ट 11 नवंबर से वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। CJI बीआर गवई की बेंच में यह मामला लिस्टेड किया गया है।

तमिलनाडु सरकार की याचिका में पूरे देश में SIR प्रक्रिया शुरू करने को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट पहले से ही बिहार में SIR की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।

पहले जानिए कौन हैं एनक्लेव महिलाएं

अगस्त 2015 में भारतीय मुख्य भूमि में 51 बांग्लादेशी एन्क्लेवों शामिल किए गए थे। यहां रहने वाली इन महिलाओं के नाम उस साल एन्क्लेव एक्सचेंज से पहले जनगणना के लिए नहीं रखे गए थे क्योंकि उनकी पहले ही शादी हो चुकी थी। वे देश के विभिन्न कोनों में अपने ससुराल वालों के साथ रहने चली गई थीं।

भारत-बांग्लादेश के बीच1974 के भूमि सीमा समझौते के तहत परिक्षेत्रों का ऐतिहासिक आदान-प्रदान हुआ।आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, भारतीय बॉर्डर में रहने वाले बांग्लादेशी परिक्षेत्रों के 15,856 निवासियों को नागरिकता दी गई।

डेटा कलेक्शन पूरा होने के बाद सरकारी विभाग डिजिटल विश्लेषण शुरू करेंगे, और विभिन्न योजनाओं में बदलाव तथा नए लाभार्थियों को शामिल करने के फैसले लिए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य अगले कुछ महीनों में पूरे राज्य का डेटा सिस्टम अपडेट कर स्मार्ट वेलफेयर मॉडल लागू करना है।

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