नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2025 । दिल्ली के लोक निर्माण एवं जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने कहा कि दिल्ली सरकार के एकीकृत प्रयासों से यमुना की सफाई में ठोस और मापने योग्य परिणाम सामने आने लगे हैं। सिर्फ सात महीनों में यमुना में फिकल कोलीफॉर्म (मानव मल प्रदूषण) के स्तर में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है – जो हाल के वर्षों में नदी के प्रदूषण में सबसे तेज़ सुधार है।
मंत्री साहिब सिंह वर्मा ने कहा,पिछली सरकार ने 10 साल तक सिर्फ घोषणाएँ कीं, हमने 7 महीनों में नतीजे दिए हैं।तीन साल में यमुना को स्वच्छ बनाने का जो संकल्प लिया था, उसमें आज चार स्थान ऐसे हैं जहाँ पानी की गुणवत्ता अनुमेय सीमा तक पहुँच चुकी है।”

फिकल कोलीफॉर्म क्या होता है और क्यों ज़रूरी है इसका नियंत्रण
फिकल कोलीफॉर्म एक प्रकार का जीवाणु है जो मानव या पशुओं के मल से आता है।
यह इस बात का मुख्य संकेतक होता है कि किसी जलस्रोत में बिना उपचार वाला सीवेज कितना पहुँच रहा है इसका स्तर जितना ज़्यादा होता है, पानी उतना ही प्रदूषित और असुरक्षित होता है।
2024 तक यमुना के कई हिस्सों में फिकल कोलीफॉर्म का स्तर लाखों में दर्ज किया गया था।
वर्तमान सरकार ने ठोस, वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों के ज़रिए यह सुनिश्चित किया है कि बिना ट्रीटमेंट का कोई भी पानी अब नदी तक न पहुँचे।

400 MGD के सीवेज अंतर को भरने के लिए कार्य प्रगति पर – STP की सख्त निगरानी जारी
मंत्री वर्मा ने बताया कि पहले दिल्ली जल बोर्ड केवल लगभग 400 MGD (मिलियन गैलन प्रतिदिन) सीवेज का ही उपचार कर पाता था, जबकि बाकी गंदा पानी सीधे यमुना में जा रहा था।
नई सरकार ने इस 400 MGD के अंतर को भरने के लिए तेज़ रफ्तार कार्यक्रम शुरू किया है, जिसमें शामिल हैं –
• मौजूदा और नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का विस्तार और उन्नयन,
• यमुना में गिरने वाले मुख्य नालों का इंटरसेप्शन, और
• हर STP की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और गुणवत्ता अनुपालन की सख्त व्यवस्था ताकि बिना ट्रीटमेंट का पानी ड्रेनेज सिस्टम में न जाए।
साथ ही सरकार ने अब तक 20 लाख मीट्रिक टन सिल्ट को प्रमुख नालों से हटाया है, जिससे पानी का प्रवाह बेहतर हुआ है और प्रदूषण घटा है।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 2024 की तुलना में 2025 में यमुना के फिकल कोलीफॉर्म स्तर में 90% तक की कमी आई है।
( तुलनात्मक आंकड़े नीचे तालिका में अलग से भेजे गए हैं )
इनमें से चार स्थान अब अनुमेय सीमा (2,500 MPN/100 ml) के भीतर या उसके बेहद करीब पहुँच चुके हैं
इतने कम समय में यह उपलब्धि पहले कभी हासिल नहीं की गई थी।
AAP नेता सौरभ भारद्वाज के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री वर्मा ने कहा – सौरभ भारद्वाज ने 9 अक्टूबर की DPCC रिपोर्ट के कुछ हिस्से दिखाए, लेकिन यह नहीं बताया कि उनके कार्यकाल में असगरपुर जैसे स्थान पर फिकल कोलीफॉर्म का स्तर 80 लाख तक पहुँच गया था।आज वही स्तर घटकर सिर्फ 8,000 रह गया है — यह हमारी सरकार के काम का प्रमाण है।”उन्होंने कहा कि अब DPCC की रिपोर्टिंग प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है:पहले ये रिपोर्टें सार्वजनिक नहीं होती थीं।आज हर रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध है — यही पारदर्शिता और जवाबदेही का फर्क है।”
नतीजों पर केंद्रित सरकार
मंत्री वर्मा ने कहा –यह सरकार दिखावे की नहीं, परिणाम की सरकार है। हर मंत्री, सांसद, विधायक और पार्षद स्वयं घाटों और नालों का निरीक्षण कर रहे हैं ताकि सुधार ज़मीन पर दिखाई दे।”उन्होंने कहा कि दिल्ली की नई शासन प्रणाली इंजीनियरिंग सटीकता, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और जवाबदेही पर आधारित है —जिससे यमुना को स्थायी रूप से साफ, स्वस्थ और जीवंत बनाया जा सकेगा।
