विधायी बहस लोकतंत्र के वृक्ष को सींचने वाला जल है” – विजेंद्र गुप्ता

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  •  कहा कि दिल्ली विधानसभा समावेशी बहस, अनुशासन और सदन की गरिमा को देती है प्राथमिकता :
  •  सार्थक चर्चा जवाबदेही सुनिश्चित करती है, जनता का विश्वास बढ़ाती है और सुदृढ़ करती है लोकतांत्रिक मूल्य

नई दिल्ली, 12 सितम्बर 2025 । “विधायी बहस लोकतंत्र के वृक्ष को सींचने वाला जल है”, यह बात दिल्ली विधान सभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आज 11वें राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सी.पी.ए.) भारत क्षेत्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही, जिसका विषय ‘विधायी संस्थाओं में संवाद एवं चर्चा : जनविश्वास का आधार, जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति का माध्यम’ था। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जल वृक्ष को बढ़ने और फलने-फूलने में मदद करता है, उसी प्रकार सार्थक बहसें और चर्चाएँ संसदीय लोकतंत्र को मज़बूत बनाती हैं और जनता की आकांक्षाओं को पूरा करती हैं।

गुप्ता ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की ज़िम्मेदारी विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। विधानसभाएँ केवल शक्ति प्रदर्शन का मंच नहीं, बल्कि जनहित में गहन और गंभीर संवाद का सर्वोच्च मंच हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की असली सफलता केवल चुनावों से नहीं आँकी जा सकती, क्योंकि वे तो पहला कदम मात्र हैं। लोकतंत्र की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि चुनावों के बाद सदन में किस स्तर की बहसें और विचार-विमर्श होते हैं।

अध्यक्ष ने ज़ोर देकर कहा कि सच्चा लोकतंत्र वही है जहाँ सभी विचारों को ध्यानपूर्वक सुना जाए। हंगामा, शोर-शराबा और वॉकआउट से न केवल सदन का समय व्यर्थ होता है बल्कि जनता की आवाज़ भी दब जाती है। उन्होंने कहा कि सबसे अच्छे वक्ता वही होते हैं जो शांति, गरिमा और ठोस तर्कों के साथ अपनी बात रखते हैं, जिससे पूरा सदन उनकी बात ध्यान से सुनता है।

दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही का उल्लेख करते हुए गुप्ता ने बताया कि यहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों को चर्चा में भाग लेने का पर्याप्त अवसर दिया जाता है। प्रश्न काल के दौरान अधिकतम सदस्यों को पूरक प्रश्न पूछने का मौका दिया जाता है। विशेष उल्लेख (नियम-280) के दौरान जरूरत पड़ने पर कार्य सूची में सूचीबद्ध नामों के अलावा भी अन्य सदस्यों को बोलने का अवसर दिया जाता है। यह प्रयास किया जाता है कि हर दिन एक अल्पकालिक चर्चा अवश्य सूचीबद्ध हो।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले सत्र के दौरान शिक्षा से जुड़े महत्त्वपूर्ण विधेयक पर सदन में 05 घंटे 08 मिनट तक रिकॉर्ड चर्चा हुई और सदन की कार्यवाही रात को साढ़े नौ बजे तक चली।

गुप्ता ने कहा कि सदन में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखना सभी सदस्यों की सामूहिक ज़िम्मेदारी है। सार्थक और गरिमामय संवाद से ही जनता का विश्वास बनता है और कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित होती है। स्वस्थ बहस उपलब्धियों को उजागर करती है, कमियों को सामने लाती है और उपयोगी सुझाव देती है।

अध्यक्ष ने कहा कि सदन के कार्य संचालन में सदस्यों का योगदान इससे पता लगता है कि उन्होंने कितनी चर्चाओं में भाग लिया है और कितने तर्कसंगत विचार प्रस्तुत किए हैं। सदन की चर्चाओं में जनता की इच्छा प्रतिबिंबित होनी चाहिए। साथ ही सदन की ज़्यादा से ज़्यादा बैठकें आयोजित होनी चाहिए ताकि जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अधिकतम चर्चा की जा सके।

विजेंद्र गुप्ता ने सभी जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सदन की गरिमा बनाए रखें और लोकतांत्रिक संस्थाओं की पवित्रता व प्रासंगिकता को निरंतर मज़बूत करने का प्रयास करें।

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