बी. सुदर्शन रेड्डी बोले- मैं नक्सल समर्थक नहीं हूं

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नई दिल्ली,। 26 अगस्त 2025 ।  विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी ने सोमवार को कहा कि वे नक्सल समर्थक बिल्कुल नहीं हैं और भारत का संविधान ही उनकी विचारधारा है। रेड्डी ने कहा कि सलवा जुडूम का फैसला सुप्रीम कोर्ट का फैसला था और वह माओवादियों के पक्ष में नहीं था। अगर ऐसा होगा, तो अब तक इसे चुनौती क्यों नहीं दी गई?

NDTV को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा- उपराष्ट्रपति चुनाव में प्रधानमंत्री समेत सभी सांसदों-मंत्रियों को पत्र लिखकर अपने लिए समर्थन मांगूंगा। मैं आंध्र प्रदेश के CM एन चंद्रबाबू नायडू से भी संपर्क करुंगा। अगर मैं चुना जाता हूं तो मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता संविधान की रक्षा करना होगी।

दरअसल, गृहमंत्री अमित शाह ने 22 अगस्त को केरल में विपक्ष की तरफ से बी सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने की आलोचना की थी। उन्होंने कहा थ, ‘सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज सुदर्शन रेड्डी वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने नक्सलवाद की मदद की। उन्होंने सलवा जुडूम पर फैसला सुनाया। अगर वह फैसला नहीं आता, तो नक्सली चरमपंथ 2020 तक खत्म हो गया होता।’

शाह ने रेड्डी पर नक्सलवाद का समर्थन करने का भी आरोप लगाया। सोमवार को रिटायर्ड जजों ने अमित शाह की टिप्पणी की आलोचना की। पूर्व जजों ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति पद का सम्मान करना ही बुद्धिमानी होगी।

सलवा जुडूम फैसला नक्सलवाद का समर्थन नहीं करता’

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों के समूह में पूर्व जज जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस जे चेलमेश्वर समेत 18 जज शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सलवा जुडूम फैसला स्पष्ट या परोक्ष रूप से नक्सलवाद या उसकी विचारधारा का समर्थन नहीं करता।

उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति पद के लिए अभियान भले ही वैचारिक हो, लेकिन इसे शालीनता और गरिमा के साथ चलाया जा सकता है। किसी भी उम्मीदवार की तथाकथित विचारधारा की आलोचना करने से बचना चाहिए।

जज बोले- फैसले की गलत व्याख्या से न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नुकसान

रिटायर्ड जजों के समूह ने बयान जारी कर कहा एक उच्च राजनीतिक पदाधिकारी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पूर्वाग्रहपूर्ण गलत व्याख्या से जजों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नुकसान पहुंच सकता है।

बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ए के पटनायक, जस्टिस अभय ओका, जस्टिस गोपाल गौड़ा, जस्टिस विक्रमजीत सेन, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस जे चेलमेश्वर, सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े और प्रो. मोहन गोपाल शामिल हैं।

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