दिल्ली विद्यालय शिक्षा (शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता) विधेयक, 2025 4 अगस्त 2025 विधानसभा मे पेश

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नई दिल्ली । 4 अगस्त 25 । दिल्ली विधानसभा में शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने ऐतिहासिक “दिल्ली विद्यालय शिक्षा (शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता) विधेयक, 2025” पेश करते हुए कहा कि आज में यहाँ दिल्ली के लाखों अभिवाकों, करोड़ों बच्चों और एक ऐसी विरासत की समस्या का स्थायी समाधान लेकर आया हूँ, जिस दशकों तक नज़रअंदाज किया गया। उन्होंने कहा की शिक्षा “एक पवित्र कार्य है एक ऐसा कर्तव्य जो हमें अपनी मातृभूमि की तरक्की और समृद्धि के लिए निभाना है। उन्होने यह भी कहा कि शिक्षा का मकसद पैसा कमाना नही, बल्कि ‘learning’ और राष्ट्र निर्माण होना चाहिए।

मंत्री सूद ने यह भी बताया कि यह शिक्षा का बिल दिल्ली के सभी पेरेंट्स के लिए हमारी ओर से एक छोटा-सा प्रयास है। डॉ. मुखर्जी के vision को सम्मान देने का, और यह सुनिश्चित करने का कि शिक्षा दिल्ली के लोगों पर बोझ न बने, बल्कि उन्हें बेहतर भविष्य की ओर ले जाने वाला रास्ता बने।

उन्होंने ऐतिहासिक दृष्टांत देते हुए केंद्र सरकार द्वारा दशकों से लटके legacy issues जैसे राम मंदिर, चेनाब ब्रिज, धारा 370, हर गाँव तक बिजली पहुचाने के प्रयासों की चर्चा की और कहा कि अब दिल्ली सरकार भी “राजधानी के पुराने और जटिल मुद्दों को सुलझाने में जुटी है, जिनमें एक अत्यंत महत्वपूर्ण legacy issue है प्राइवेट स्कूलों की लगातार बढ़ती फीस।

मंत्री ने स्पष्ट भी किया कि यह कोई हाल की समस्या नहीं, बल्कि पिछले कई दशकों से दिल्ली के माता-पिता को परेशान करने वाला सवाल रहा है।
उन्होंने बीते वर्षों में सरकारी शिक्षा तंत्र की गिरती गुणवत्ता, स्कूलों की भारी कमी, और निजी स्कूलों की फीस वृद्धि की वजह से माता-पिता की वित्तीय और मानसिक कठिनाइयों का भी अपनी चर्चा में उल्लेख किया।

पूर्व सरकारों पर कटाक्ष करते हुए सूद ने कहा की पिछली सरकारों ने बार-बार सिर्फ दिखावे के लिए ही आदेश जारी किए थे लेकिन वे या तो शिक्षा माफ़ियाओं से डरते रहे या उनसे साठगांठ करते रहे। उन्होंने न तो किसी स्कूल का कोई audit कराया, न ही कोई record, सब ad-hoc basis पे चलता रहा। शिक्षा माफिया के साथ मिलकर काम करते रहे।

उन्होंने यह भी बताया कि आप सरकार ने अपने कार्यकाल में केवल 20 नए स्कूल बनवाए, बाकी स्कूलों की स्वीकृति पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में दी गई थी।

शिक्षा विधेयक के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार है।

यह बिल दिल्ली के सभी private unaided recognized schools पर लागू होगा।

हर स्कूल को तीन वर्ष की प्रस्तावित फीस पहले ही दाखिल करनी होगी, और केवल तीन साल में एक बार ही संशोधन संभव होगा।

स्कूल, जिला और राज्य स्तर पर तीन -स्तरीय रेगुलेशन एवं अपील कमेटियाँ बनाई गई है।

फीस निर्धारण के मानदंड बनाये गए है। स्कूल का इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्टाफ का वेतन, वार्षिक वृद्धि, किन्तु मुनाफाखोरी को रोकना अनिवार्य किया गया है

नए बिल के अनुसार सभी स्कूलों को वित्तीय रिकॉर्ड और प्रस्तावित फीस सार्वजनिक करनी होगी।

गैरकानूनी वृद्धि पर ₹1 से 10 लाख तक का दंड, दुबारा करने पर जुर्माना डबल/ट्रिपल, छात्र का नाम काटना/अपमानित करना आदि पर ₹50,000 प्रति छात्र जुर्माना।

बार-बार उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता रद्द करना या सरकार द्वारा उस स्कूल का संचालन करना भी संभव होगा।

विवाद लंबित रहने पर स्कूल पिछले वर्ष की फीस ही ले सकेगा।

मंत्री ने कहा की यह Bill न केवल एक पारदर्शी और accountable system बनाता है, बल्कि बच्चों, अभिभावकों और स्कूलों के सभी stakeholders के हितों की रक्षा भी करता है।

अंत में, सूद ने कहा कि यह बिल सही मायनों में bottom-up approach है, जिसमें पहली बार माता-पिता को निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी दी गई है—‘Government of the people, by the people, for the people’।

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