- लोधी रोड के बाद अब शांतिपथ और अफ्रीका एवेन्यू पर वायु प्रदूषण से निपटने की पहल
नई दिल्ली । 6 जून 25 । नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने आज बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “ईज ऑफ लिविंग” मिशन की भावना के अनुरूप NDMC क्षेत्र को स्वच्छ, हरा-भरा और प्रदूषण-मुक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में दूसरे फेज में अफ्रीका एवेन्यू और शांतिपथ में बिजली के खंभों पर “मिस्ट स्प्रेयर” प्रणाली स्थापित करने की योजना शुरू की गई है। यह पहल तेजी से बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने और नागरिकों को शुद्ध एवं बेहतर वातावरण प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
चहल ने बताया कि बिजली के खंभों पर लगाए जाने वाले मिस्ट स्प्रेयर वायु प्रदूषण नियंत्रण का एक आधुनिक और प्रभावी उपाय हैं। ये स्प्रेयर हवा में मौजूद धूल कणों और प्रदूषकों को छोटे-छोटे जलकणों के माध्यम से नीचे गिरा देते हैं, जिससे वायु की गुणवत्ता में सुधार होता है और लोगों को सांस लेने के लिए एक स्वच्छ वातावरण मिलता है। विशेष रूप से घनी आबादी और उच्च यातायात वाले क्षेत्रों में इनकी उपयोगिता और बढ़ जाती है। ये प्रणाली न केवल प्रदूषण को कम करती है, बल्कि हरियाली को भी बनाए रखने में सहायक होती है, और जब इसमें उपचारित जल का उपयोग किया जाए तो यह जल संरक्षण के उद्देश्य को भी पूरा करती है।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना का पहला चरण लोधी रोड पर सफलतापूर्वक पूरा किया गया था, जहां 500 मीटर लंबे हिस्से में 15 खंभों पर मिस्ट स्प्रेयर लगाए गए थे। इस कार्य पर लगभग ₹34 लाख का व्यय हुआ और इसके विभिन्न वर्गों से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। इसकी सफलता को आधार बनाकर अब दूसरे चरण में शांतिपथ और अफ्रीका एवेन्यू जैसे प्रमुख क्षेत्रों में इस तकनीक को लागू किया जा रहा है। परिषद का उद्देश्य है कि इस नवाचार को क्रमबद्ध रूप से पूरे NDMC क्षेत्र में विस्तार दिया जाए।
अब अफ्रीका एवेन्यू के लगभग 850 मीटर लंबे खंड में 30 बिजली के खंभों पर मिस्ट स्प्रेयर लगाए जाएंगे। प्रत्येक खंभे पर पांच नोजल होंगे और प्रत्येक नोजल में छह छिद्र होंगे, जिससे प्रति खंभा 30 बिंदुओं से एक साथ जल का छिड़काव किया जाएगा। यह प्रणाली प्रति खंभा प्रति घंटे लगभग 84 लीटर उपचारित जल का उपयोग करेगी। इसके लिए 5,000 लीटर की क्षमता वाले चार टैंक स्थापित किए जाएंगे। शांतिपथ के लगभग 900 मीटर लंबे खंड में भी इसी प्रकार की प्रणाली स्थापित की जाएगी। इस परियोजना का कार्यादेश जारी किया जा चुका है और इसे जुलाई-अगस्त 2024 तक एक माह की अवधि में पूरा कर लिया जाएगा।
चहल ने यह भी बताया कि NDMC प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में पहले से ही अनेक आधुनिक उपायों को लागू कर रही है। सड़कों की सफाई के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपर्स (MRS) को जीपीएस ट्रैकिंग के साथ क्षेत्र में तैनात किया गया है, जिनकी निगरानी स्मार्ट सिटी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से की जाती है। परिषद द्वारा खरीदी गई एंटी-स्मॉग गन और मिस्ट स्प्रे मशीनों का उपयोग धूल और वायु में मौजूद कणों को नियंत्रित करने हेतु समय-समय पर किया जाता है। साथ ही, 5,000 से 10,000 लीटर क्षमता वाले टैंकरों की सहायता से सड़कों के किनारे पेड़-पौधों और झाड़ियों पर उपचारित जल का छिड़काव किया जा रहा है, जिससे ताजे पानी की बर्बादी न हो।
परिषद द्वारा हरियाली को बढ़ावा देने के लिए नियमित रूप से पौधारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं। सड़क किनारे हरित पट्टियों की देखरेख, नियमित सिंचाई तथा निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए आवश्यक उपायों को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। ये सभी प्रयास प्रधानमंत्री के प्रदूषण-मुक्त और पर्यावरण-संतुलित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं।
कुलजीत चहल ने कहा कि टीम एनडीएमसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत@2047” के विज़न से प्रेरित है। यह टीम पर्यावरणीय स्थिरता के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने, प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करने तथा नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में निरंतर सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
