देहरादून , 18 मार्च 2026 । भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत एक जूनियर इंजीनियर (JE) को 80 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई ने सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस नए अपार्टमेंट में पत्नी के नाम से बिजली का नया कनेक्शन लेने और जरूरत के हिसाब से विद्युत भार बढ़ाने के लिए उसने आवेदन किया था। आरोप है कि नया ट्रांसफार्मर न लगाने और ऐसे ही लोड बढ़ाने के लिए पथरी बाग स्थित 33/11 केवी बिजली घर जेई ने रिश्वत मांगी। जेई अतुल कुमार निवासी इंद्रेशनगर, देहरादून ने इसके एवज में 80 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। बिना पैसे दिए काम अटकाए रखा। शिकायत पर विजिलेंस टीम देहरादून ने पहले मामले की गोपनीय जांच की। जब प्रथम दृष्टया रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हो गई तो आरोपी जेई को रंगे हाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया।
मामला तब सामने आया जब एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि संबंधित जेई काम कराने के बदले रिश्वत की मांग कर रहा है। शिकायत मिलने के बाद एंटी-करप्शन टीम ने जाल बिछाया और तय योजना के तहत आरोपी को रिश्वत लेते समय पकड़ लिया।
जैसे ही आरोपी जेई ने रिश्वत की रकम स्वीकार की, टीम ने मौके पर ही उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसियों ने रकम को भी बरामद कर लिया है और मामले में आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
जांच और कानूनी कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, उसके अन्य कार्यों और संपत्ति की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं वह लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में शामिल तो नहीं था।
इस कार्रवाई को सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि रिश्वतखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं
यह घटना आम नागरिकों को भी जागरूक करती है कि अगर उनसे कोई अधिकारी रिश्वत मांगता है, तो वे इसकी शिकायत संबंधित एजेंसी से करें। शिकायत के आधार पर इस तरह की कार्रवाई संभव है।
कुल मिलाकर, 80 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए जेई की गिरफ्तारी भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई है, जो सिस्टम को पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
