दिल्ली शराब नीति केस: केजरीवाल ने जज बदलने की मांग की, सता रहा न्यायिक पक्षपात का डर

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नई दिल्ली, 12 मार्च 2026 । दिल्ली की चर्चित Delhi Excise Policy Case में नया मोड़ आ गया है। Arvind Kejriwal ने अदालत में याचिका दाखिल कर मामले की सुनवाई कर रहे जज को बदलने की मांग की है। उन्होंने दलील दी है कि उन्हें न्यायिक पक्षपात का डर सता रहा है और इसलिए निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए जज बदलना जरूरी है।

एक चौंकाने वाले कानूनी घटनाक्रम में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय को पत्र लिखकर आबकारी नीति मामले को किसी अन्य बेंच में ट्रांसफर करने का औपचारिक अनुरोध किया है। बुधवार को लिखे गए इस पत्र में केजरीवाल ने आशंका जताई कि मौजूदा जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष चल रही कार्यवाही में आवश्यक “निष्पक्षता और तटस्थता” की कमी हो सकती है।

27 फरवरी को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को आबकारी नीति मामले में आरोपमुक्त कर दिया था। सीबीआई ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद जस्टिस शर्मा ने 9 मार्च को नोटिस जारी किया और ट्रायल कोर्ट के उस निर्देश पर रोक लगा दी जिसमें जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की बात कही गई थी।

बताया जा रहा है कि केजरीवाल की ओर से दायर आवेदन में कहा गया है कि अदालत में कुछ ऐसी परिस्थितियां सामने आई हैं जिनसे निष्पक्षता को लेकर आशंका पैदा हुई है। इसी आधार पर उनके वकीलों ने अदालत से अनुरोध किया कि केस को किसी अन्य न्यायाधीश के समक्ष स्थानांतरित किया जाए।

यह मामला दिल्ली की शराब नीति से जुड़े कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है, जिसकी जांच Enforcement Directorate (ED) और Central Bureau of Investigation (CBI) कर रही हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि नई शराब नीति लागू करने के दौरान कुछ नियमों में बदलाव कर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया।

वहीं आम आदमी पार्टी और केजरीवाल लगातार इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते रहे हैं। उनका कहना है कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी मुकदमे में यदि किसी पक्ष को न्यायिक पक्षपात की आशंका होती है तो वह अदालत से जज बदलने की मांग कर सकता है। हालांकि इस तरह के अनुरोध पर अंतिम फैसला अदालत ही करती है और वह उपलब्ध तथ्यों तथा परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेती है।

फिलहाल अदालत इस याचिका पर विचार कर रही है और आने वाले दिनों में इस पर निर्णय सामने आ सकता है। इस मामले को लेकर देश की राजनीति और न्यायिक व्यवस्था दोनों पर नजरें टिकी हुई हैं।

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