नई दिल्ली, 12 मार्च 2026 । भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए Russia से करीब 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदने का फैसला किया है। यह सौदा भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान-इजराइल में जारी जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज रूट बंद हो गया है। ऐसे में कच्चे तेल की सप्लाई बंद होने के बाद भारत करीब 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदेगा। वहीं जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो रही है। गैस सिलेंडर लेने के लिए एजेंसियों पर लंबी लाइनें लगी हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कच्चा तेल आने वाले महीनों में चरणबद्ध तरीके से भारत भेजा जाएगा। तेल रिफाइनरियां इसे प्रोसेस करके पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में बदलेंगी। इससे देश की घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और ऊर्जा आपूर्ति स्थिर बनी रहेगी।
यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण रूस ने कई देशों को रियायती दरों पर कच्चा तेल बेचना शुरू किया था। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए India ने भी पिछले कुछ वर्षों में रूस से तेल आयात बढ़ाया है। सस्ता कच्चा तेल मिलने से भारतीय रिफाइनरियों को लागत कम रखने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में से एक है और अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा करता है। इसलिए अलग-अलग देशों से तेल खरीदना और आपूर्ति के कई स्रोत बनाए रखना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी रणनीति है।
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार रूस से सस्ता कच्चा तेल मिलने से भारत के आयात बिल पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में भी कुछ मदद मिल सकती है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकार मानते हैं कि भविष्य में भी भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विविध स्रोतों से कच्चा तेल खरीदने की रणनीति जारी रखेगा, ताकि वैश्विक बाजार में किसी भी अनिश्चितता का असर कम से कम हो।
