नई दिल्ली, 11 मार्च 2026 ।दिल्ली में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वरिष्ठ राजनयिक Taranjit Singh Sandhu ने राष्ट्रीय राजधानी के नए उपराज्यपाल के रूप में शपथ ली। उन्हें शपथ Delhi High Court के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिलाई गई। शपथ ग्रहण समारोह में कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे। पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू ने लोक निवास में बुधवार को आयोजित समारोह में दिल्ली के 23वें उपराज्यपाल के रूप में शपथ ली। दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और अन्य लोगों की उपस्थिति में संधू को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। संधू को विनय कुमार सक्सेना की जगह दिल्ली का एलजी बनाया गया है। वीके सक्सेना को लद्दाख का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है।
तरनजीत सिंह संधू लंबे समय तक कूटनीतिक सेवा में सक्रिय रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्हें प्रशासनिक और कूटनीतिक मामलों का व्यापक अनुभव है। उनके इस नए दायित्व को दिल्ली के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
उपराज्यपाल के रूप में संधू अब दिल्ली के प्रशासनिक और संवैधानिक कार्यों में अहम भूमिका निभाएंगे। राजधानी में कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक समन्वय और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में उपराज्यपाल की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उनके अनुभव और प्रशासनिक समझ से दिल्ली के शासन तंत्र को मजबूती मिल सकती है। आने वाले समय में राजधानी में विकास योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों को लेकर भी उनकी भूमिका पर सबकी नजर रहेगी।
दिल्ली का उपराज्यपाल पद संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का प्रशासन केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच समन्वय से चलता है। ऐसे में इस पद पर नियुक्त व्यक्ति को प्रशासनिक संतुलन और नीति क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभानी होती है।
