नई दिल्ली, 11 मार्च 2026 । स्कूल पाठ्यपुस्तकों में शामिल एक विवादित अध्याय को लेकर अब सख्ती देखने को मिल रही है। शिक्षा से जुड़े अधिकारियों ने उस टीम के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं जिसने यह अध्याय तैयार किया था। मामला सामने आने के बाद पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट NCERT के कक्षा 8वीं की सोशल साइंस की किताब में ‘करप्शन इन द ज्यूडिशियरी’ नाम का सब-चैप्टर तैयार करने वाली टीम को हटाने की तैयारी में है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और पब्लिक फंडेड इंस्टीट्यूशन्स को निर्देश दिया है कि NCERT के सोशल साइंस करिकुलम के चेयरपर्सन प्रोफेसर मिशेल डेनिनो को पाठ्यक्रम से अलग करें।
साथ ही, उनके दो अन्य सहयोगी सदस्यों दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार को भी किसी भी तरह से पाठ्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल न किया जाए। इसके अलावा, तीनों को नेक्स्ट जनरेशन टेक्स्टबुक्स को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया से भी अलग किया जाए।
जानकारी के अनुसार यह अध्याय National Council of Educational Research and Training (NCERT) की एक पाठ्यपुस्तक से जुड़ा बताया जा रहा है। अध्याय के कुछ हिस्सों को लेकर आपत्ति जताई गई थी, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने इस पर गंभीरता से संज्ञान लिया।
अधिकारियों का कहना है कि स्कूल की किताबों में शामिल सामग्री बेहद संवेदनशील होती है और उसका छात्रों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसलिए पाठ्यपुस्तकों की सामग्री तैयार करते समय सटीकता, संतुलन और जिम्मेदारी का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। इसी कारण संबंधित टीम की भूमिका की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक जांच में यह देखा जाएगा कि विवादित सामग्री किस प्रक्रिया के तहत तैयार हुई और उसे अंतिम रूप देने से पहले समीक्षा में किन-किन स्तरों से मंजूरी मिली। यदि किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाठ्यपुस्तकों की सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया पारदर्शी और विशेषज्ञों की समीक्षा पर आधारित होनी चाहिए। इससे न केवल छात्रों को सही जानकारी मिलती है बल्कि शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता भी बनी रहती है।
इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा जगत में पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा प्रक्रिया को और मजबूत बनाने की मांग भी उठने लगी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
