पटना , 11 मार्च 2026 । बिहार में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच विपक्षी एकजुटता की कोशिशों को झटका तब लगा जब All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) के विधायकों ने Tejashwi Yadav की बुलाई बैठक से दूरी बना ली। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में नई अटकलें शुरू हो गई हैं कि क्या AIMIM का रुख Asaduddin Owaisi के नेतृत्व में National Democratic Alliance (NDA) के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
राज्यसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों के बीच रणनीति तय करने के लिए यह बैठक बुलाई गई थी। माना जा रहा था कि विपक्षी दल एकजुट होकर चुनावी रणनीति बनाएंगे, लेकिन AIMIM विधायकों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक समीकरणों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में हर विधायक का वोट राज्यसभा चुनाव के दौरान काफी अहम हो जाता है। ऐसे में यदि AIMIM का रुख अलग रहता है तो इससे चुनावी गणित प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि AIMIM के रुख को लेकर अलग-अलग तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हालांकि AIMIM की ओर से इस मामले में स्पष्ट तौर पर यह नहीं कहा गया है कि वह किस पक्ष का समर्थन करेगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे अपने राजनीतिक हितों और रणनीति को ध्यान में रखते हुए फैसला लेंगे।
दूसरी ओर विपक्षी दलों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में सभी दलों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि राजनीतिक संतुलन बना रहे। वहीं NDA खेमे में भी इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि यदि विपक्ष पूरी तरह एकजुट नहीं रहता है तो इसका सीधा फायदा सत्तारूढ़ गठबंधन को मिल सकता है।
बिहार की राजनीति में पहले भी छोटे दल कई बार चुनावी समीकरण बदलने में अहम भूमिका निभा चुके हैं। इसलिए AIMIM के रुख को लेकर सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह मामला राज्यसभा चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
