उत्तराखंड , 10 मार्च 2026 । हिमालयी क्षेत्र में भारत और जापान के बीच बढ़ती सैन्य साझेदारी ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को नया आयाम दिया है। दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त सैन्य अभ्यास धर्म गार्डियन के जरिए अपनी रणनीतिक क्षमता और आपसी तालमेल को मजबूत कर रही हैं। इस अभ्यास को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत और जापान के बीच आयोजित संयुक्त सैन्य अभ्यास धर्म गार्डियन 2026 खूबसूरत उत्तराखंड के चौबटिया में कामयाबी के साथ खत्म हो गया. 24 फरवरी से 8 मार्च तक चले इस संयुक्त अभ्यास में भारतीय सेना और जापान की ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स के जवानों ने मिलकर आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन, शहरी युद्ध और कठिन पहाड़ी इलाकों में सैन्य कार्रवाई का अभ्यास किया. रक्षा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक यह सैन्य अभ्यास सिर्फ मिलिट्री ट्रेनिंग ही नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते सुरक्षा हालात के बीच एक अहम रणनीतिक संदेश भी है, जिसे चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है.
भारत और जापान के सैनिक कठिन पर्वतीय परिस्थितियों में युद्धक रणनीति, आतंकवाद विरोधी अभियान और सामरिक समन्वय का अभ्यास कर रहे हैं। इस संयुक्त प्रशिक्षण का उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना और भविष्य में किसी भी सुरक्षा चुनौती का मिलकर सामना करने की क्षमता विकसित करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभ्यास केवल सैन्य प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी भी स्पष्ट होती है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत और जापान लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं।
इस अभ्यास में आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल, संयुक्त ऑपरेशन की रणनीति और पर्वतीय इलाकों में युद्धक कौशल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे की सैन्य कार्यशैली और तकनीकी क्षमताओं को समझने का मौका मिलता है।
विश्लेषकों का कहना है कि एशिया में बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत और जापान का यह सहयोग क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे सैन्य अभ्यास यह संदेश देते हैं कि दोनों देश सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर गंभीर हैं।
