मुजफ्फरपुर, 09 मार्च 2026 । बिहार के Muzaffarpur में अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों के रवैये पर कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आदेशों का पालन नहीं करने पर संबंधित डीएसपी को गिरफ्तार किया जाए। साथ ही इस मामले में लापरवाही और अदालत के निर्देशों की अनदेखी करने वाले 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई का आदेश दिया गया।
यह आदेश विशेष एनडीपीएस कोर्ट-2 के न्यायाधीश नरेंद्र पाल सिंह ने दिया है. अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह कड़ी कार्रवाई की. बताया गया कि कुढ़नी और सदर थाना क्षेत्र से जुड़े मादक पदार्थ जब्ती के दो अलग-अलग मामलों में संबंधित पुलिसकर्मियों को गवाही के लिए अदालत में उपस्थित होना था, लेकिन बार-बार तलब किए जाने के बावजूद वे कोर्ट में पेश नहीं हो रहे थे. इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी.
बताया जा रहा है कि यह मामला काफी समय से अदालत में लंबित था और कोर्ट ने पहले भी पुलिस प्रशासन को जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। हालांकि बार-बार निर्देश देने के बावजूद अधिकारियों द्वारा आदेशों को टाला जा रहा था। इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कड़ी टिप्पणी की और सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि कानून के शासन में अदालत के आदेश सर्वोपरि होते हैं और किसी भी अधिकारी को उन्हें नजरअंदाज करने का अधिकार नहीं है। यदि कोई अधिकारी जानबूझकर अदालत के आदेशों को टालता है, तो यह न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर मामला माना जाएगा।
मामले में जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है, उनमें कुछ अधिकारी और कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं। अदालत ने प्रशासन से स्पष्ट रिपोर्ट भी मांगी है कि आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया और इसमें किस स्तर पर लापरवाही हुई।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के सख्त निर्देश यह संदेश देते हैं कि अदालत के आदेशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। इससे प्रशासनिक अधिकारियों को भी यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि न्यायिक निर्देशों का पालन करना उनकी जिम्मेदारी है।
अब सभी की नजर इस पर है कि पुलिस प्रशासन अदालत के आदेशों का पालन कैसे करता है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
