TMC ने राज्यसभा के लिए 4 कैंडिडेट का ऐलान किया

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कोलकाता , 28 फ़रवरी 2026 । All India Trinamool Congress (TMC) ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। इस ऐलान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पार्टी नेतृत्व ने संगठनात्मक संतुलन और राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन किया है।

तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार शाम को राज्यसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। इनमें मंत्री बाबुल सुप्रियो, बंगाल के पूर्व DGP राजीव कुमार, सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी और एक्ट्रेस कोयल मल्लिक का नाम शामिल है।

TMC ने X पर एक पोस्ट में लिखा- हम इन उम्मीदवारों को दिल से बधाई और शुभकामनाएं देते हैं। वे तृणमूल की मजबूती की विरासत और हर भारतीय के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए उसके पक्के वादे को बनाए रखेंगे।

पश्चिम बंगाल समेत महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना से चुने गए 37 सदस्यों का टर्म अप्रैल महीने में खत्म हो जाएगा। इन खाली सीटों पर 16 मार्च को वोटिंग होगी।

बंगाल से 2026 में राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं। इनमें से चार TMC के पास थीं। 294 सदस्यों वाली विधानसभा में मजबूत संख्या के साथ TMC पांच में से चार राज्यसभा सीटें जीतने वाली है, जबकि विपक्षी BJP को एक सीट मिलने की उम्मीद है।

राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों का चयन केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें क्षेत्रीय, सामाजिक और संगठनात्मक समीकरणों का भी ध्यान रखा जाता है। TMC ने ऐसे चेहरों को आगे बढ़ाने की कोशिश की है जो पार्टी की विचारधारा को संसद में प्रभावी ढंग से रख सकें।

संसद में मजबूती की तैयारी

राज्यसभा में संख्या बल किसी भी दल के लिए महत्वपूर्ण होता है, खासकर जब राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतियों पर चर्चा होती है। TMC का यह कदम संसद के उच्च सदन में अपनी उपस्थिति और प्रभाव को मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है।

घोषणा के बाद विपक्षी दलों ने भी अपनी रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है। राज्यसभा चुनाव में अक्सर क्रॉस-वोटिंग और गठजोड़ की भूमिका अहम रहती है। ऐसे में चुनाव परिणाम तक राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।

उम्मीदवारों के नामांकन की औपचारिक प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी की जाएगी। यदि सीटों की संख्या और उम्मीदवारों की संख्या बराबर रहती है, तो चुनाव निर्विरोध भी हो सकता है; अन्यथा मतदान की नौबत आएगी।

यह ऐलान आगामी राजनीतिक समीकरणों का संकेत माना जा रहा है और राज्यसभा चुनाव को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।

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