प. बंगाल में SIR,हर सीट पर औसतन 19000 नाम हटे

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कोलकाता, 21 फ़रवरी 2026 । पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक माहौल गरम है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, औसतन हर विधानसभा सीट पर करीब 19,000 नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इस कदम ने प्रशासनिक प्रक्रिया बनाम राजनीतिक मंशा की बहस को तेज कर दिया है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दो-तीन माह ही बचे हैं। यहां अभी भाषण और रैलियों का शोर नहीं है। लेकिन, सियासत भरपूर गर्म है। कोलकाता के न्यू मार्केट से चांदनी चौक, न्यू टाउन से जेसप बिल्डिंग और मुर्शिदाबाद के बेलडांगा से बर्द्धमान तक करीब 600 किमी के सफर में साफ हो गया कि अभी वोटर लिस्ट ही चुनावी रणभूमि बनी हुई है।

कोलकाता के एक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं कि ममता बनर्जी ने SIR की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट ले जाकर अपनी जुझारू छवि फिर हाईलाइट की है। टीएमसी उनके सुप्रीम कोर्ट के वीडियो वायरल कर रही है। जगह-जगह ममता की काले कोट में होर्डिंग लगे हैं। भाजपा SIR को घुसपैठियों के खिलाफ लड़ाई बता रही थी। पर, ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ यानी विसंगति के आधार पर जारी सवा करोड़ बंगाली लाइन में लग गए हैं। हर सीट पर औसतन 19 हजार से ज्यादा नाम हटे हैं।

SIR यानी Special Intensive Revision—मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण। इसका उद्देश्य डुप्लीकेट, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाकर सूची को अपडेट करना होता है।

पूरी प्रक्रिया की निगरानी Election Commission of India करता है। आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिससे मतदाता सूची अधिक सटीक बनती है।

राज्य की सत्ताधारी पार्टी All India Trinamool Congress और अन्य दलों ने आरोप लगाया है कि बड़े पैमाने पर नाम हटाने से खास समुदायों और क्षेत्रों के मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। उनका दावा है कि यह कदम आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक संतुलन बदल सकता है।

भाजपा का पक्ष

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