पंडित दीनदयाल जी के एकात्म मानववाद का सिद्धांत भारत को एक ओजस्वी राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है – शिवप्रकाश

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  • आज जो भाजपा के पास सबसे बड़ा कार्यकर्ताओं का संगठन है उसके भगीरथ थे पं. दीनदयाल उपाध्याय जी — वीरेन्द्र सचदेवा

नई दिल्ली 11 फरवरी 26 । पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्य तिथी को दिल्ली भाजपा ने समर्पण दिवस के रूप में मनाते हुए आज प्रातः पं. दीनदयाल उपाध्याय उपवन में स्मृति सभा का आयोजन किया। सभी 14 जिला कार्यालयों में पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के प्रति समर्पण दिवस कार्यक्रम हुए।

भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने पं. दीनदयाल उपाध्याय जी का स्मृति व्याख्यान रख उनके जीवन के विशेष पहलुओं का जीवंत जीवन एवं कार्य परिचय कार्यकर्ताओं के समक्ष रखा।

भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश ने दीनदयाल उपाध्याय जी के बलिदान दिवस पर कहा कि आज हमारी पार्टी के सबसे अधिक विधायक, सांसद और स्थानीय निकायों में जनप्रतिनिधि है लेकिन हमारा संगठन जहां से उठकर आज विश्व का सबसे बड़ा संगठन बना है उसके पीछे के संघर्षों को हमें याद रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी उन सफल व्यक्तित्व में से एक हैं जिन्होंने जनसंघ की नींव रखी।

शिव प्रकाश ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता के पश्चात देश और दुनिया के अंदर राजनीतिक क्षेत्र में तीन विचार- पूंजीवाद, साम्यवाद और समाजवाद बहुत तेजी से अलग-अलग देशों में उभर रहे थे। उसी दौरान भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद इस बात पर चर्चा हो रही थी कि भारत का स्वरुप क्या होगा। इस पर विचार करने के लिए पार्टी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को दायित्व दिया और लंबे विचार विमर्श के बाद उन्होंने जो विचार दिया वह है- एकात्म मानववाद जो आज भारत को एक ओजस्वी राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

शिवप्रकाश ने कहा कि विकास की पंक्ति में अंतिम व्यक्ति को कितना सुख मिला उसे अन्त्योदय की संज्ञा दी गई जिसे वर्तमान सरकार ने जमीन पर उतारने का काम किया है।

उन्होंने कहा कि 1965 में विजयवाड़ा के अधिवेशन के दौरान अन्त्योदय और एकात्म मानववाद को पार्टी की नीतियों और विचारों के रुप में स्वीकृत किया गया।

उन्होंने कहा कि दीनदयाल जी का आकस्मिक मृत्यु ने जरुर पूरे देश में एक सनसनी जरुर फैलाई लेकिन उन्होंने एक विधान एक संविधान के विचार को मजबूत करने पर जोर दिया और इसके पीछे संगठन की शक्ति थी। 1952-68 तक जनसंघ में राष्ट्र व्यापी एक ढ़ाचा तैयार किया। उनके अथक प्रयास और यह पं. दीनदयाल उपाध्याय के पुरुषार्थ का परिणाम है कि 1964 आते-आते कांग्रेस के विकल्प के रुप में भारतीय जनसंघ स्थापित हो गया और दिल्ली नगर निगम के चुनाव जीतकर पहली बार किसी निकाय में सत्ता में आई।

आज अगर हमें विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनने का गौरव प्राप्त हुआ है तो उसके पीछे पं. दीनदयाल उपाध्याय जी जैसे कई विभूतियों के अथक प्रयास, विचार से बिना समझौता किए आगे बढ़कर राष्ट्र सर्वोपरी के रुप में हमने काम किया है।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर राष्ट्र उन्हें एक ऐसे विचारक और कर्मयोगी के रूप में स्मरण कर रहा है, जिन्होंने भारतीय राजनीति को सत्ता की नहीं, बल्कि सेवा की दिशा दी। पंदीनदयाल उपाध्याय के पुरुषार्थ का परिणाम है कि 1964 आते-आते कांग्रेस का विकल्प के रुप में भारतीय जनसंघ स्थापित हो गया और दिल्ली नगर निगम के चुनाव जीतकर पहली बार किसी निकाय में सत्ता में आए।

उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी द्वारा प्रतिपादित “एकात्म मानववाद” का सिद्धांत आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था। उनका विचार था कि समाज, अर्थव्यवस्था और राजनीति को अलग-अलग खांचों में नहीं देखा जा सकता। मानव जीवन की भौतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक आवश्यकताओं का संतुलित विकास ही सच्ची प्रगति है।

उन्होंने अंत्योदय का विचार देकर यह स्पष्ट किया कि राष्ट्र की उन्नति का पैमाना वही होगा, जहाँ समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी सम्मानजनक जीवन जी सके। गरीब, किसान, श्रमिक, महिला और वंचित वर्ग का सशक्तिकरण उनके चिंतन का मूल आधार था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही जनकल्याणकारी योजनाएँ—गरीब कल्याण, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, किसान सम्मान निधि और आत्मनिर्भर भारत— पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों की ही आधुनिक अभिव्यक्ति हैं। यह शासन व्यवस्था उनके सपनों के भारत को साकार करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।

सचदेवा ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का निजी जीवन सादगी, अनुशासन और त्याग का अद्भुत उदाहरण रहा। उन्होंने राजनीति को आजीविका नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का माध्यम माना। सत्ता और पद से दूर रहते हुए भी उन्होंने करोड़ों कार्यकर्ताओं को राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि उनकी पुण्यतिथि पर यह आवश्यक है कि हम उनके विचारों को केवल स्मरण तक सीमित न रखें, बल्कि अपने व्यवहार और कार्यों में उतारें। सामाजिक समरसता, राष्ट्र प्रथम की भावना और अंत्योदय का संकल्प—यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
वीरेन्द्र सचदेवा ने सभा की अध्यक्षता करते हुए कहा की आज जो भाजपा के पास सबसे बड़ा कार्यकर्ताओं का संगठन है उसके भगीरथ थे पं. दीनदयाल उपाध्याय जी। उन्होने कहा आज पं. दीनदयाल उपाध्याय जी को सच्ची श्रद्धांजली देते हुए संगठन कार्यक्रमों में समय का अनुपालन करें।

इस अवसर पर आयोजित स्मृति सभा में मंचासीन दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा, पूर्व अध्यक्ष एवं दिल्ली विधानसभाध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष एवं सांसद मनोज तिवारी, सांसद एवं प्रदेश महामंत्री योगेन्द्र चांदोलिया, पूर्व अध्यक्ष आदेश गुप्ता, प्रदेश महामंत्री विष्णु मित्तल के साथ विधायक अजय महावर, राजकुमार भाटिया, प्रदुमन राजपूत, कुलदीप सोलंकी एवं रवि नेगी, प्रदेश पदाधिकारियों मूलचंद चावला, विनय रावत, योगिता सिंह, सतीश गर्ग, प्रवीण शंकर कपूर, सोना कुमारी, किशन शर्मा, बृजेश राय, राजन तिवारी, संतोष ओझा, विनोद सहरावत, ऋचा पांडेय, अनीस अब्बासी, डा. अनिल गुप्ता, सुनीता कांगड़ा, सारिका जैन, विक्रम मित्तल, शुभेन्दू शेखर अवस्थी, अजय सहरावत, नितिन त्यागी, अमित गुप्ता, ममता त्यागी के आलावा सभी 14 जिलाध्यक्षों के साथ दिल्ली के उपमहापौर जयभगवान यादव, स्थाई समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा, वरिष्ठ निगम पार्षद योगेश वर्मा, संदीप कपूर, संजीव सिंह आदि सम्मलित हुए।

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