स्वदेशी के प्रथम समर्थक थे दयानन्द -विमलेश बंसल दर्शनाचार्या

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  •  महर्षि दयानन्द का वर्णीय कार्य विषय पर गोष्ठी सम्पन्न

गाजियाबाद । 10 फरवरी  2026,  केन्द्रीय आर्य युवक परिषद् के तत्वावधान में “महर्षि दयानन्द के वर्णीय कार्य ” विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।य़ह कोरोना काल से 769 वाँ वेबिनार था।

वैदिक विदुषी आचार्या विमलेश बंसल ने कहा कि महर्षि दयानन्द जी ने कहा था कोई कितना ही करे परंतु स्वदेशी राज्य सर्वोत्तम है। साथ ही उन्होंने हिंदी को भी अपने जीवन में स्थान देने की बात रखी उन्होंने कहा कि हिन्दी ही ऐसी भाषा है जो सबको जोड़ती हैं l

मुख्य अतिथि कृष्णा पाहुजा व अध्यक्ष डॉ रचना चावला ने कहा कि नारी जाती को यज्ञोपवीत पहनने का वेद पढने का अधिकार नहीं था जो स्वामी दयानन्द जी ने दिलवाया परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कुशल संचालन करते हुए कहा कि महर्षि दयानन्द ने तर्क शक्ति का विकास किया और लोगों के सोंचने की दिशा व दशा ही बदल डाली प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

गायिका कौशल्या अरोड़ा, जनक अरोड़ा, शोभा बत्रा, कमला हंस आदि ने महर्षि दयानन्द यशोगान भजनों के माध्यम से किया।

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