पेंगुइन का दावा- नरवणे की किताब पब्लिश नहीं हुई

Date:

नई दिल्ली, 10 फ़रवरी 2026 । पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एम.एम. नरवणे की प्रस्तावित किताब को लेकर चल रही अटकलों के बीच प्रकाशन संस्था पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने स्पष्ट किया है कि संबंधित पुस्तक अब तक प्रकाशित नहीं हुई है। इस बयान के बाद उस किताब से जुड़े दावों और अंशों को लेकर चल रही चर्चाओं पर नया मोड़ आ गया है।

पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी (Four Stars of Destiny)’ पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने कहा कि किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई। इसका कोई हिस्सा सार्वजनिक नहीं किया गया।

कंपनी ने कहा कि पब्लिशिंग के सभी राइट्स हमारे पास हैं। अब तक किताब की न तो कोई छपी हुई कॉपी आई है और न ही डिजिटल कॉपी सामने आई है।

इसके जवाब में राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा- या तो नरवणे झूठ बोल रहे हैं, या पेंगुइन कंपनी। वहीं कंपनी के बयान को पूर्व आर्मी चीफ ने X पर रीपोस्ट किया। उन्होंने लिखा- यह है बुक पर स्थिति।

दरअसल, कंपनी की सफाई इसलिए आई क्योंकि किताब की अनअथॉराइज्ड कॉपियों के लीक और ऑनलाइन सर्कुलेशन का दावा सामने आया था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने FIR भी दर्ज की है।

सूत्रों के अनुसार, जनरल नरवणे अपनी सेवा अवधि और सैन्य अनुभवों पर आधारित एक पुस्तक लिख रहे थे, जिसमें 2020 के लद्दाख गतिरोध, भारत-चीन सीमा तनाव और सैन्य रणनीतिक निर्णयों का जिक्र होने की संभावना बताई जा रही थी। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पुस्तक के कथित अंशों को लेकर विवाद खड़ा हुआ, जिसके बाद प्रकाशक ने स्थिति स्पष्ट की।

पेंगुइन की ओर से कहा गया कि संबंधित शीर्षक अभी प्रकाशन प्रक्रिया में है और आधिकारिक रूप से बाजार में जारी नहीं किया गया है। किसी भी कथित अंश या सामग्री को अंतिम और प्रमाणिक नहीं माना जाना चाहिए। प्रकाशन उद्योग में आम तौर पर पांडुलिपि (मैन्युस्क्रिप्ट) के कई चरण होते हैं—संपादन, कानूनी समीक्षा और अंतिम स्वीकृति—जिनके बाद ही किताब प्रकाशित की जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य अधिकारियों की आत्मकथाएं या संस्मरण अक्सर संवेदनशील विषयों को छूते हैं, खासकर जब वे राष्ट्रीय सुरक्षा, कूटनीति या सीमावर्ती घटनाओं से जुड़े हों। ऐसे मामलों में प्रकाशन से पहले विस्तृत कानूनी और नीतिगत समीक्षा की जाती है।

यह घटनाक्रम दर्शाता है कि उच्च पदों पर रहे अधिकारियों की पुस्तकों को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक दिलचस्पी काफी रहती है। अब सबकी नजर इस पर है कि पुस्तक कब आधिकारिक रूप से प्रकाशित होगी और उसमें किन विषयों का विस्तार से उल्लेख होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related