सुप्रीम कोर्ट में EC बोला-बंगाल SIR में राजनीतिक दखल हुआ

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नई दिल्ली, 06 फ़रवरी 2026 । सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग (EC) ने पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR – Special Intensive Revision) को लेकर बड़ा दावा किया। आयोग ने कहा कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण कार्य में राजनीतिक हस्तक्षेप के संकेत मिले हैं, जिससे निष्पक्षता और पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।

EC ने अदालत को बताया कि मतदाता सूची का SIR एक नियमित और कानूनी प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना और अपात्र नाम हटाना होता है। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया के दौरान स्थानीय स्तर पर कुछ संगठनों और राजनीतिक तत्वों द्वारा दबाव बनाने की कोशिश की गई। EC ने अदालत से आग्रह किया कि उसे स्वतंत्र रूप से अपना काम करने दिया जाए ताकि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।

इलेक्शन कमीशन (EC) ने सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को पश्चिम बंगाल में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर हलफनामा दाखिल किया। EC ने कोर्ट में बताया कि बंगाल में SIR के दौरान लगातार राजनीतिक दखल जारी है।

EC ने कहा- अन्य राज्यों में SIR की प्रक्रिया बिना किसी बड़ी घटना या रुकावट के पूरी हुई, लेकिन पश्चिम बंगाल की स्थिति अलग है। वहां चुनाव अधिकारियों के खिलाफ हिंसा हो रही है। उन्हें धमकियां मिल रही हैं। ऐसे हालात बन गए हैं जिनमें चुनाव अधिकारी काम करने में असमर्थ हैं।.

EC ने आरोप लगाया कि बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) की शिकायतों पर लोकल पुलिस आमतौर पर FIR दर्ज करने से बचती रही। कई मामलों में जिला चुनाव अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही केस दर्ज हुए। राज्य सरकार ने जानबूझकर EC के निर्देशों का पालन नहीं किया।

EC ने बताया कि 24 नवंबर 2025 को कोलकाता स्थित चीफ इलेक्शन ऑफिसर के दफ्तर में प्रदर्शनकारियों ने जबरन घुसने की कोशिश की, पुलिस बैरिकेड तोड़े, दफ्तर में तोड़फोड़ की और अधिकारियों की आवाजाही रोकी। इसके बावजूद भी प्रदर्शनकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया से कुछ वर्गों के मतदाताओं को प्रभावित किया जा सकता है। इस पर आयोग ने स्पष्ट किया कि सभी कार्य निर्धारित दिशानिर्देशों और कानूनी प्रावधानों के तहत हो रहे हैं। EC ने कहा कि पारदर्शिता के लिए दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया खुली है और किसी भी मतदाता को निर्धारित समयसीमा के भीतर अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदाता सूची की शुद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसमें किसी भी प्रकार की राजनीतिक दखलंदाजी गंभीर विषय है।

यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि मतदाता सूची में बदलाव सीधे तौर पर चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और संभावित निर्देशों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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