लोकसभा में मोदी, शाह के सामने TMC सांसदों की नारेबाजी

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नई दिल्ली, 03 फ़रवरी 2026 । लोकसभा के बजट सत्र 2026 के दौरान विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में विरोध स्वर उठाते हुए लोकसभा के भीतर नारेबाजी की, जिससे संसद की कार्यवाही बाधित हो गई और राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण हो गया। यह घटना केवल राजनीतिक नारेबाज़ी नहीं थी, बल्कि एक संवेदनशील सुरक्षा और संघ-राज्य संबंधों से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया का प्रतीक भी मानी जा रही है।

TMC सांसदों का मुख्य आरोप था कि पश्चिम बंगाल के सरकारी गेस्ट हाउस के बाहर केंद्रीय सुरक्षा बलों और पुलिस की भारी तैनाती की गई है, जिसे सांसदों ने राज्य की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप के रूप में देखा। इसी विरोध को लेकर TMC के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सामने जाकर नारेबाजी की, “हमारा लोकतंत्र बचाओ” और “राज्य की सम्मान रक्षा करो” जैसे नारे लगाए। यह विरोध मुख्य रूप से सुरक्षा बलों की तैनाती, संघ-राज्य अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता जैसे संवेदनशील विषयों से जुड़ा था।

लोकसभा में सोमवार को राहुल गांधी ने भाषण के दौरान जोरदार हंगामा हुआ। उन्होंने पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे की अनपब्लिश्ड बुक का हवाला देकर चीनी टैंक घुसपैठ की बात कही। टीएमसी सांसदों ने पीएम मोदी और शाह के सामने नारेबाजी की , TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने पीएम मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह के सामने नारेबाजी की। दरअसल, जैसे ही पीएम सदन में पहुंचे, कल्याण बनर्जी वेल से निकलकर दूसरी तरफ पहुंच गए। मोदी, शाह और राजनाथ के सामने नारेबाजी करने लगे। राजनाथ उन्हें वापस जाने के लिए कहते रहे।

इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने नियमों के उल्लंघन के कारण सांसदों को शांत रहने और अपनी सीटों पर लौटने का निर्देश दिया, लेकिन नारेबाजी जारी रहने से सदन की कार्यवाही बाधित हो गई। विपक्षी सांसदों ने कहा कि यह कदम राज्य के प्रति अनुचित दबाव बनाने जैसा है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वहीं, प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे अमित शाह और रक्षा मंत्री ने कहा कि संसद में राष्ट्रीय सुरक्षा विषयों को बिना विस्तृत तथ्यों के उठाना संवेदनशील है और इसे जिम्मेदार तरीके से उठाया जाना चाहिए।

यह विरोध लोकतांत्रिक प्रक्रिया का भाग है, लेकिन संसद जैसे विधायी मंच पर आक्रामक नारेबाजी कार्यवाही और नियमों के बीच संतुलन को चुनौती देती है। विपक्ष का तर्क है कि जब संवेदनशील मामलों पर सवाल उठाने का अधिकार है, तो वे उसे लोकतांत्रिक रूप से करेंगे; वहीं सरकार का कहना रहा कि समानता, तथ्य-आधारित बहस और कार्यवाही को बाधा न पहुँचाना आवश्यक है।

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